पूर्वांचल राज्य संवाददाता दीपू तिवारी
रेणुकूट (सोनभद्र)। मुर्धवा क्षेत्र में रविवार को राष्ट्रीय परशुराम परिषद के तत्वावधान में भगवान परशुराम जन्मोत्सव श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही और पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी मनोज पांडेय एवं राजकीय इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य राजनारायण मिश्र द्वारा भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं विधिवत पूजन के साथ किया गया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि मनोज पांडेय ने कहा कि भगवान परशुराम न्याय, साहस और धर्म के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने तथा समाज में समरसता बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उनके आदर्शों को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
पूर्व प्रधानाचार्य राजनारायण मिश्र ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के तपस्वी और विद्वान भी थे। उन्होंने समाज को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का महत्व बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें और उसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
डॉ. आशुतोष दत्त त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि परशुराम जन्मोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। ऐसे कार्यक्रमों से भाईचारा और सामाजिक एकता को मजबूती मिलती है। वहीं विजय नाथ पांडे ने कहा कि हमें अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं पर गर्व करना चाहिए तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ना चाहिए।
कार्यक्रम के आयोजक उमेश ओझा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाते रहेंगे।
इस अवसर पर पं. दीपकृष्ण महाराज, देवेंद्र शुक्ला, पंकज मिश्रा, मनीष मिश्रा, रविंद्र पांडेय, अजय तिवारी, संदीप तिवारी, मनोज तिवारी सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मस्तराम मिश्रा ने किया, जबकि समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता का सुंदर संगम देखने को मिला।










