पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। बेल्थरा रोड में भीषण अग्निकांड के बाद हल्दीरामपुर-छपिया गांव अब धीरे-धीरे राहत से आगे बढ़कर पुनर्निर्माण की राह पर कदम बढ़ा रहा है। शुरुआती दिनों की अफरा-तफरी और बेबसी के बीच अब हालात में बदलाव दिखने लगा है, हालांकि जख्म अभी भी गहरे हैं। अग्निकांड के बाद से पीड़ित परिवारों की मदद के लिए समाज के विभिन्न वर्ग लगातार आगे आ रहे हैं। बुधवार को नवजीवन इंग्लिश स्कूल की प्रिंसिपल ग्रेसी जान के नेतृत्व में विद्यालय परिवार ने गांव पहुंचकर राहत सामग्री वितरित की। इस दौरान उन्होंने उन परिवारों से भी मुलाकात की, जिनकी बेटियों की शादी के लिए जुटाए गए सामान और नकदी आग में जल गई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शादी से पहले इन परिवारों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी खुशियां दोबारा संवर सकें। गौरतलब है कि इस अग्निकांड में 60 से अधिक घर जलकर राख हो गए थे, जिससे सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे। शुरुआत में लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी, लेकिन अब ग्रामीण, प्रधान और प्रशासन के सहयोग से लोग तिरपाल और अस्थायी साधनों के सहारे अपने आशियाने खड़े करने लगे हैं। राहत के रूप में चलाया गया लंगर, जिसने शुरुआती दिनों में सैकड़ों लोगों की भूख मिटाई, अब रविवार से बंद हो चुका है। गांव के लोग धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या की ओर लौटते हुए खुद भोजन बनाने लगे हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि हालात अब धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं। सरकारी स्तर पर भी राहत कार्यों में तेजी आई है। शासन द्वारा 65 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे प्रभावित परिवारों को स्थायी छत मिलने की उम्मीद जगी है। इसके अलावा 76 पीड़ित परिवारों के खातों में 13-13 हजार रुपये की सहायता राशि भी भेजी गई है, जिससे तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।हालांकि इस त्रासदी का सबसे संवेदनशील पहलू अब भी स्वास्थ्य से जुड़ा है। आग में गंभीर रूप से झुलसी कंचन का इलाज लखनऊ के पीजीआई में जारी है, जहां उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। पिछले दिनों जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, शिक्षक दंपति, व्यापार मंडल और सामाजिक संगठनों द्वारा की गई मदद ने गांव को संभालने में अहम भूमिका निभाई है। उपजिलाधिकारी शरद चौधरी ने जहां अपने तरफ से 5 हजार वहीं लेखपाल संघ ने 25 हजार रुपए की मदद की। अब नवजीवन इंग्लिश स्कूल की पहल ने इस सहयोग की कड़ी को और मजबूत किया है। हल्दीरामपुर-छपिया की कहानी अब सिर्फ दर्द की नहीं, बल्कि संघर्ष और पुनर्निर्माण की भी बनती जा रही है, जहां राख के ढेर से उठकर लोग फिर से अपने घर, अपने सपने और अपनी जिंदगी को संवारने में जुटे हैं।
हल्दीरामपुर-छपिया अग्निकांड राहत से पुनर्निर्माण की ओर गांव, सरकार ने भी दी आर्थिक सहायता










