Home / Uncategorized / सोनभद्र में 1 मई से शुरू होगी मॉर्निंग कोर्ट व्यवस्था, बार एसोसिएशन ने किया स्वागत

सोनभद्र में 1 मई से शुरू होगी मॉर्निंग कोर्ट व्यवस्था, बार एसोसिएशन ने किया स्वागत

पूर्वांचल राज्य संवाददाता: दीपू तिवारी

सोनभद्र, 30 अप्रैल 2026।
जनपद में भीषण गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए न्यायालय के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, सोनभद्र की मांग पर 1 मई 2026 से न्यायालय का संचालन प्रातःकालीन सत्र में किया जाएगा। नए समय के अनुसार अब अदालतें सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक संचालित होंगी। इस निर्णय को न्यायिक कार्यप्रणाली में सुधार और जनहित के दृष्टिकोण से एक अहम कदम माना जा रहा है।

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री पवन कुमार सिंह (एडवोकेट) ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीष्म ऋतु में अत्यधिक तापमान के कारण दोपहर के समय न्यायालय में कार्य करना अधिवक्ताओं, वादकारियों और कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार तेज धूप और लू के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित होता है। ऐसे में मॉर्निंग कोर्ट व्यवस्था सभी वर्गों को राहत प्रदान करेगी।

बार एसोसिएशन ने न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे दूरदर्शी और जनहितकारी कदम बताया है। संगठन की ओर से सभी अधिवक्ताओं से अपील की गई है कि वे समय का पालन करें और नई व्यवस्था को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दें। उनका मानना है कि समयबद्ध तरीके से कार्य होने पर न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और लंबित मामलों के निस्तारण में भी सुधार होगा।

स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि सुबह के समय कार्य करने से न केवल कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी राहत मिलेगी। वहीं, वादकारियों के लिए भी यह व्यवस्था अधिक सुविधाजनक साबित होगी, क्योंकि उन्हें दोपहर की भीषण गर्मी से राहत मिलेगी और वे समय से अपने मामलों की सुनवाई में उपस्थित हो सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होती है। कई अन्य जनपदों और राज्यों में भी गर्मियों के दौरान मॉर्निंग कोर्ट का सफल संचालन किया जाता रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

गौरतलब है कि हर वर्ष तापमान में वृद्धि के साथ न्यायालयों के समय में बदलाव की मांग उठती है। इस वर्ष समय रहते लिया गया यह निर्णय न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि न्याय व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की दिशा में एक सार्थक पहल भी है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *