अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी विवाद ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने मंगलवार को इस पूरे मामले पर खुलकर बात की। उन्होंने जहां एक तरफ पूर्व महासचिव चंपत राय की ईमानदारी का बचाव किया, वहीं दूसरी तरफ उनके पूर्व ड्राइवर और अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति ‘टिन्नू’ को लेकर बेहद सनसनीखेज दावे किए हैं।
इस बीच, पुलिस प्रशासन को इस मामले में बड़ी कामयाबी मिली है और अदालत से तीन मुख्य आरोपियों की पुलिस रिमांड मंजूर हो गई है।
चंपत राय निर्दोष हैं, लेकिन व्यवस्था में थी बड़ी चूक
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने चंपत राय के इस्तीफे और उनके ऊपर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि चंपत राय निजी तौर पर इस गबन में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनके इर्द-गिर्द के लोगों ने व्यवस्था का गलत फायदा उठाया।
स्वामी गोविंद देव गिरि का बड़ा बयान:
“मैं जब यह कहता हूं कि वे (चंपत राय) निर्दोष हैं, तो मेरा सीधा मतलब है कि इस पूरे कांड के साथ उनका कोई चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। वे पूरी तरह ईमानदार हैं। लेकिन दिक्कत यह थी कि उन्होंने एक अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति ‘टिन्नू’ को अपना ड्राइवर रख रखा था, जो धीरे-धीरे वहां की व्यवस्थाओं को कंट्रोल करने लगा था।”
ड्राइवर ‘टिन्नू’ पर गंभीर आरोप: सब कुछ करता था कंट्रोल
कोषाध्यक्ष के बयानों से साफ है कि मंदिर की सुरक्षा और दान की गिनती (SOP) के नियमों में जो लापरवाही हुई, उसके पीछे चंपत राय के स्टाफ का बड़ा हाथ था। सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू नाम का यह शख्स ट्रस्ट की आंतरिक गतिविधियों और कर्मचारियों के आने-जाने पर अपना प्रभाव रखता था। इसी का फायदा उठाकर गणनाकर्मियों ने जूतों और कपड़ों में नोट छिपाकर चोरी करने का दुस्साहस किया।
3 आरोपियों की पुलिस रिमांड मंजूर, उगलेंगे कई राज
इस पूरे मामले में पुलिस एक्शन भी तेज हो गया है। एसआईटी (SIT) की नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अब तक आठ लोगों को जेल भेजा जा चुका है। ताजा अपडेट के मुताबिक:
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पुलिस ने कोर्ट से मुख्य आरोपियों की कस्टडी मांगी थी।
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अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 प्रमुख आरोपियों की पुलिस रिमांड मंजूर कर ली है।
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अब पुलिस इन तीनों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की गई रकम कहां छुपाई गई है और इस रैकेट में ट्रस्ट के अंदर से और कौन-कौन शामिल था।
पारदर्शिता की तरफ बढ़ रहे कदम
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद पूर्व आईएफएस (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंप दी गई है। स्वामी गोविंद देव गिरि के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि ट्रस्ट अब अपनी छवि को सुधारने और व्यवस्था को पूरी तरह साफ-सुथरा व पारदर्शी बनाने के लिए किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
Key Highlights: राम मंदिर विवाद (ताजा अपडेट्स)
| बिंदु | मुख्य विवरण |
| कोषाध्यक्ष का बयान | स्वामी गोविंद देव गिरि ने चंपत राय को चरित्र से निर्दोष बताया। |
| मुख्य आरोपी का कनेक्शन | चंपत राय के ड्राइवर ‘टिन्नू’ (अपराधी) पर व्यवस्था कंट्रोल करने का आरोप। |
| पुलिस कार्रवाई | अदालत से 3 मुख्य आरोपियों की पुलिस रिमांड मंजूर। |
| SIT का एक्शन | अब तक 8 आरोपी भेजे जा चुके हैं जेल। |
| अगला कदम | रिमांड के दौरान चोरी की रकम की बरामदगी और नए चेहरों की पहचान की जाएगी। |










