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मुसीबत बना धानी ढाला रेलवे फाटक: घंटों महाजाम में फंसी रहती हैं एंबुलेंस

मुसीबत बना धानी ढाला रेलवे फाटक: घंटों महाजाम में फंसी रहती हैं एंबुलेंस, भड़के छात्रों व राहगीरों ने की ओवरब्रिज निर्माण व अतिक्रमण हटाने की मांगविशेष

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो,
,महराजगंज (फरेंदा)नगर पंचायत आनंदनगर कस्बे का व्यस्ततम धानी ढाला रेलवे फाटक इन दिनों स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और स्कूली बच्चों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। रेलवे द्वारा ट्रेनों के आवागमन के नाम पर बार-बार और लंबे समय के लिए फाटक गिराए जाने के कारण यहां रोजाना किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग रहा है। इस महाजाम में रोजाना आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं (एंबुलेंस) घंटों फंसी रहती हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही और स्थानीय निकाय की उदासीनता के चलते फाटक के दोनों ओर सड़क किनारे भारी अवैध अतिक्रमण फैल चुका है, जिससे स्थिति दिन-ब-दिन और अधिक नारकीय होती जा रही है। आक्रोशित जनता ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बनाते हुए यहां तत्काल ओवरब्रिज निर्माण और बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण साफ करने की मांग उठाई है।आपातकालीन सेवाएं ठप, एंबुलेंस में तड़पते हैं मरीजधानी ढाला मार्ग क्षेत्र को जिला मुख्यालय और अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली मुख्य लाइफलाइन है। स्थानीय राहगीरों का आरोप है कि रेलवे द्वारा बिना किसी उचित समय प्रबंधन के बार-बार फाटक बंद कर दिया जाता है। फाटक बंद होते ही सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। सबसे भयावह स्थिति तब देखने को मिलती है जब गंभीर मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस इस जाम चक्रव्यूह में फंस जाती हैं। हूटर बजाने के बावजूद एंबुलेंस को निकलने की जगह नहीं मिलती, जिससे समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीजों की स्थिति नाजुक हो जाती है।छात्रों का भविष्य दांव पर, समय से नहीं पहुंच पाते स्कूलइस अव्यवस्था का सबसे बुरा असर स्कूली छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। सुबह स्कूल जाने और दोपहर में छुट्टी के समय जब फाटक बंद होता है, तो स्कूली बसें, वैन और साइकिल सवार छात्र घंटों धूप और धूल के बीच फंसे रहते हैं। कई छात्रों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जाम के कारण उनकी कक्षाएं छूट जाती हैं और परीक्षाओं के दिनों में मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। राहगीरों का कहना है कि पैदल चलने वालों तक के लिए इस मार्ग से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।रेलवे की शह पर फला-फूला अवैध अतिक्रमण, सिकुड़ गई सड़कआक्रोशित जनता और व्यापार मंडल के सदस्यों ने रेलवे विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि रेलवे फाटक के ठीक बगल में और रेल भूमि पर अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध रूप से पक्की व कच्ची दुकानें, खोमचे और ठेले बसा दिए गए हैं। इन अवैध दुकानों के कारण सड़क की चौड़ाई आधी रह गई है। जब भी रेलवे फाटक खुलता है, तो इन दुकानों के सामने खड़े बेतरतीब वाहनों के कारण ‘बॉटलनेक’ बन जाता है, जिससे लगा हुआ जाम खुलने में कई घंटे और लग जाते हैं।जनता की दो टूक: ओवरब्रिज ही एकमात्र स्थायी समाधानत्रस्त हो चुके आनंदनगर के नागरिकों, राहगीरों और छात्रों ने सामूहिक रूप से प्रशासन को चेतावनी देते हुए दो सूत्रीय मांग रखी है:रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की तत्काल स्वीकृति: धानी ढाला पर बिना किसी देरी के ओवरब्रिज का निर्माण शुरू किया जाए ताकि रेल यातायात और सड़क यातायात दोनों निर्बाध रूप से चल सकें।अतिक्रमण विरोधी अभियान: रेलवे और नगर पंचायत प्रशासन तत्काल संयुक्त रूप से अभियान चलाकर फाटक के आसपास से सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करे और सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराए।स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने इस गंभीर जनसमस्या का संज्ञान लेकर जल्द ही धरातल पर काम शुरू नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए विवश होंगे

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