315 फरेंदा विधानसभा सीट पर अमरमणि की चुनावी तैयारी से गर्माई सियासत, मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने खोला मोर्चाकांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच पूर्व मंत्री की सक्रियता बढ़ी;
मृतका की बहन ने राज्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेजकर पात्रता को दी चुनौती, दी आंदोलन की चेतावनी।
: महराजगंज जिले की सबसे प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील फरेंदा (315) विधानसभा सीट पर चुनावी सरगर्मियां अचानक तेज हो गई हैं। कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट चुके उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी द्वारा इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने और आगामी चुनाव लड़ने की तैयारियों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमरमणि की इन तैयारियों और उनके कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की अटकलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मृतका की बहन निधि शुक्ला ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लखीमपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए निधि शुक्ला ने साफ किया कि वह किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण देने के कदम का पुरजोर विरोध करेंगी।फरेंदा में स्वागत समारोह के बाद शुरू हुआ विवादमामले की शुरुआत बीती 8 सितंबर को हुई, जब फरेंदा (315) विधानसभा क्षेत्र में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त का आगमन हुआ था। इस दौरान स्थानीय स्तर पर अमरमणि त्रिपाठी का स्वागत किए जाने और उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं सार्वजनिक हुईं। निधि शुक्ला ने रविवार दोपहर मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं स्वयं कांग्रेस पार्टी की सदस्य हूँ। हमारा केंद्रीय नेतृत्व हमेशा महिला सम्मान और उच्च राजनीतिक आदर्शों की वकालत करता है। ऐसे में फरेंदा में हुई इस घटना और अमरमणि को पार्टी से जोड़ने के किसी भी प्रयास को मैं स्वीकार नहीं करूँगी।”सोनिया और प्रियंका गांधी के पुराने स्टैंड का दिया हवालाअपनी बहन को न्याय दिलाने के लिए पिछले 25 वर्षों से संघर्ष कर रहीं निधि शुक्ला ने कांग्रेस के पुराने रुख का स्मरण कराया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में जब उन्होंने इस कानूनी लड़ाई की पैरवी शुरू की थी, तब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें न्याय का पूरा भरोसा दिया था। इसके साथ ही वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी ने भी हमेशा अमरमणि त्रिपाठी से दूरी बनाए रखी थी। निधि ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी दल ने उन्हें टिकट दिया, तो वह राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष धरना, अनशन और व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी।राज्य चुनाव आयोग पहुंची शिकायत: 2029 तक चुनावी पात्रता पर सवालअमरमणि त्रिपाठी को चुनावी मैदान में उतरने से रोकने के लिए निधि शुक्ला ने राज्य चुनाव आयुक्त को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में उन्होंने चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पूर्व ही अमरमणि के आपराधिक रिकॉर्ड को संज्ञान में लेने की मांग की है:लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला: पत्र में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि विशेष सीबीआई अदालत (देहरादून) द्वारा 24 अक्टूबर 2007 को सुनाई गई उम्रकैद की सजा के कारण अमरमणि की चुनाव लड़ने की अयोग्यता वर्ष 2029 तक प्रभावी है। यद्यपि उन्हें वर्ष 2023 में रिमिशन (समय पूर्व रिहाई) के आधार पर जेल से रिहा किया गया था, परंतु तकनीकी रूप से वे चुनाव लड़ने के पात्र नहीं हैं।लंबित मुकदमों का उल्लेख: शिकायत में बस्ती जिले में दर्ज एक पुराने अपहरण के मामले का भी संदर्भ दिया गया है, जिसमें कोर्ट से उनके विरुद्ध अपराधी घोषित करने और संपत्ति कुर्की से संबंधित अदालती कार्रवाई लंबित है।सक्रियता की जांच की मांग: निधि ने आरोप लगाया कि इन मामलों के बावजूद अमरमणि नौतनवा और फरेंदा (315) क्षेत्रों में निरंतर राजनीतिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि अधिसूचना जारी होने के बाद उनके नामांकन पत्रों की कड़ाई से संवीक्षा (जांच) की जाए।राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें 315 फरेंदा सीट पर टिकींत्रिपाठी परिवार का फरेंदा क्षेत्र से पुराना नाता रहा है, जिसे वे अपनी राजनीतिक पुनर्वापसी का आधार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। किंतु निधि शुक्ला द्वारा महिला आयोग, न्यायालय और चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने की घोषणा के बाद, यह सीट न केवल महराजगंज बल्कि पूरे प्रदेश में कानूनी और राजनीतिक बहस का मुख्य केंद्र बन गई है।










