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जिसे मृत समझकर पांच साल पहले कर दिया अंतिम संस्कार, वही महिला जिंदा लौटी घर

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली)
महराजगंज में हैरान करने वाला मामला: गलत पहचान से हुआ था शव का अंतिम संस्कार, कोलकाता की संस्था ने परिवार से मिलाया

महराजगंज। जिले में एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पांच साल पुराने पूरे घटनाक्रम को फिर से चर्चा में ला दिया है। जिस महिला को परिजनों ने मृत समझकर वर्ष 2021 में अंतिम संस्कार कर दिया था, वह महिला पांच साल बाद सकुशल अपने घर लौट आई। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद महराजगंज पुलिस ने जांच कर पूरे घटनाक्रम का स्पष्टीकरण जारी किया है।
पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2021 में कोल्हुई थाना क्षेत्र के लबदहा गांव के दक्षिण-पूर्व स्थित खेत में करीब 42 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला का शव बरामद हुआ था। उस समय शव की तत्काल पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया और पहचान के लिए समाचार पत्रों, सोशल मीडिया तथा स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कराया।
पुलिस के अनुसार, अगले दिन नौतनवा क्षेत्र की रहने वाली गमला देवी अपने बेटे और भाभी के साथ थाने पहुंचीं। उन्होंने बरामद शव की पहचान अपनी बहन इसरावती पुत्री स्वर्गीय चिनक साहनी, निवासी बरगदही, थाना सोनौली के रूप में की। परिजनों ने चेहरे, कपड़ों और चप्पलों के आधार पर शव की पहचान की थी।
पहचान के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद त्रिमुहानी घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मौत का कारण सेप्टीसीमिया/शॉक यानी गंभीर संक्रमण बताया गया था। पुलिस के अनुसार शव करीब पांच से सात दिन पुराना था। पंचायतनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच में किसी आपराधिक कृत्य, रंजिश या साजिश के साक्ष्य नहीं मिले थे।
इधर जिंदा थी इसरावती, भटकते-भटकते पहुंच गई कोलकाता
पुलिस के मुताबिक मानसिक रूप से अस्वस्थ इसरावती उस दौरान भटकते हुए कोलकाता पहुंच गई थी। वहां एक सामाजिक संस्था ने उन्हें आश्रय दिया और उनकी देखभाल की। वर्षों तक संस्था के संरक्षण में रहने के बाद उनकी पहचान और परिवार तक पहुंचने का रास्ता खुला।
रक्षाबंधन पर परिवार को मिली जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी
बताया गया कि 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर सामाजिक संस्था की टीम इसरावती को लेकर उनके पैतृक गांव बरगदही पहुंची। इसके बाद उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पांच साल बाद इसरावती को सामने देखकर परिवार के लोग भी हैरान रह गए।
महराजगंज पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि वर्ष 2021 में बरामद अज्ञात महिला के शव की पहचान परिजनों ने कपड़ों और हुलिया के आधार पर भूलवश गलत कर दी थी। फिलहाल इसरावती सुरक्षित है और अपने परिवार के साथ रह रही है।
पांच साल तक परिवार ने जिसे खोया हुआ मान लिया था, उसकी अचानक वापसी ने पूरे इलाके को हैरत में डाल दिया है। मामला सामने आने के बाद 2021 में हुई शव की पहचान और उस समय की परिस्थितियां भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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