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आईसीएफ: जहां सपनों को मिलते हैं पहिए, वंदे भारत से आगे भविष्य की ट्रेनें तैयार

चेन्नई स्थित कोच फैक्ट्री में पीआईबी वाराणसी के पत्रकारों ने देखा आधुनिक भारत की रेल क्रांति का धड़कता केंद्र

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो चेन्नई।

भारत में आधुनिक रेल तकनीक और कोच निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर चुकी इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई आज केवल रेल डिब्बे बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की हाई-स्पीड और अत्याधुनिक रेल यात्रा का खाका भी तैयार कर रही है। पीआईबी वाराणसी द्वारा आयोजित तमिलनाडु प्रेस टूर के तहत पत्रकारों के एक दल ने गुरुवार को आईसीएफ का भ्रमण कर देश में विकसित हो रही स्वदेशी रेल तकनीक और आधुनिक विनिर्माण क्षमता को करीब से देखा।

आईसीएफ के चीफ वर्कशॉप इंजीनियर अनुपम चौहान ने पत्रकारों को फैक्ट्री की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और भविष्य की परियोजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां वर्तमान में वंदे भारत ट्रेनसेट, अमृत भारत ट्रेन के कोच, कोलकाता मेट्रो के डिब्बे सहित विभिन्न आधुनिक रेल कोचों का निर्माण किया जा रहा है।

वंदे भारत से आगे की तैयारी

अनुपम चौहान ने बताया कि भारतीय रेलवे की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईसीएफ अगली पीढ़ी के ट्रेनसेट विकसित करने पर कार्य कर रहा है। वंदे भारत प्लेटफॉर्म को और अधिक उन्नत बनाते हुए वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा माल परिवहन के लिए आधुनिक ट्रेनसेट और भविष्य की हाई-स्पीड ट्रेनों हेतु स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करने के प्रयास भी जारी हैं।

स्वदेशी तकनीक की पहचान बना वंदे भारत

वंदे भारत ट्रेनसेट आज भारतीय रेल के आधुनिकीकरण का प्रतीक बन चुका है। स्वदेशी डिजाइन और उच्च स्तर के स्थानीयकरण के साथ तैयार इन ट्रेनों में स्वचालित दरवाजे, जैव-वैक्यूम शौचालय, सीसीटीवी निगरानी, यात्री सूचना प्रणाली, उन्नत सुरक्षा उपकरण और बेहतर राइड कम्फर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विनिर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आईसीएफ को वर्ष 2024 का राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।

उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार

आईसीएफ की उपलब्धियां केवल वंदे भारत तक सीमित नहीं हैं। आधुनिक और सुरक्षित एलएचबी कोचों के निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय रेलवे ने वर्ष 2014 से 2025 के बीच 42,600 से अधिक एलएचबी कोचों का उत्पादन किया है, जिसमें आईसीएफ का उल्लेखनीय योगदान रहा है। इसके अलावा मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के लिए एसी ईएमयू रेक के निर्माण में भी इसकी भागीदारी है।

यात्री सुविधा और सुरक्षा पर विशेष जोर

पत्रकारों को बताया गया कि कोच निर्माण में तकनीकी नवाचार के साथ यात्री सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सीटिंग व्यवस्था, वातानुकूलन, सुरक्षा प्रणाली, स्वच्छता, सूचना तंत्र और बेहतर यात्रा अनुभव के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

आईसीएफ का यह दौरा पत्रकारों के लिए भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, स्वदेशी रेल तकनीक और भविष्य की परिवहन व्यवस्था को समझने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। वंदे भारत से लेकर हाई-स्पीड ट्रेन परियोजनाओं तक, आईसीएफ भारतीय रेल को नई गति और नई पहचान देने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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