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कोरोना बना ‘कुबेर काल’: जीएसटी अफसरों ने टैक्स के पैसों से खड़ा किया भ्रष्टाचार का पहाड़

कोरोना बना ‘कुबेर काल’: जीएसटी अफसरों ने टैक्स के पैसों से खड़ा किया भ्रष्टाचार का पहाड़

बेनामी ज़मीन से लेकर डोलो स्टोन तकः जीएसटी विभाग में 200 करोड़ का सुपर घोटाला

जब देश लड़ा कोरोना से, जीएसटी अफसर बना रहे थे जमीन-जायदाद का साम्राज्य

खदान से खजाना तकः टैक्स की मलाई में डूबा जीएसटी सिंडिकेट

 

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, लखनऊ।

जब देश महामारी से जूझ रहा था, लोग अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे थे, तब उत्तर प्रदेश के जीएसटी विभाग के कुछ अधिकारी अपने करियर की सबसे बड़ी लूट में लगे थे। यह कोई मामूली घोटाला नहीं, बल्कि एक ऐसा भ्रष्टाचार का महाकाव्य है, जिसमें जमीन से लेकर पहाड़ तक भ्रष्टाचार की परतें बिछाई गईं और सब कुछ हुआ जनता के टैक्स के पैसों से।

ताजा जांच में खुलासा हुआ है कि 50 से ज्यादा जीएसटी अफसरों ने कोरोना काल के दौरान 200 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी जमीनें और खनिज-पहाड़ी क्षेत्र खरीदे। इनमें से कई अधिकारी मलाईदार पदों पर वर्षों तक जमे रहे, और जब कमाई से ज्यादा “काली कमाई” हो गई, तो उसे बिल्डरों और माफिया नेटवर्क के जरिए रजिस्ट्री और खनन क्षेत्रों में खपा दिया गया।

मोहनलालगंज और सुल्तानपुर रोड की ज़मीनें बनीं ‘काले धन’ की कब्रगाह

लखनऊ के मोहनलालगंज और सुल्तानपुर रोड पर लाखों वर्ग मीटर जमीन अफसरों ने अपने, परिजनों और फर्जी नामों से खरीदी। यह जमीनें एक चर्चित बिल्डर के माध्यम से खरीदी गईं, जो विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का करीबी रिश्तेदार है।

बिल्डर ने अपने प्रभाव से विभाग के भीतर एक सिंडिकेट तैयार किया, जिसमें अफसरों को काली कमाई को वैध करने का सीधा प्रस्ताव दिया गया  “पैसा दीजिए, नाम हमारा लगाइए, ज़मीन आपकी हो जाएगी।”

 

काली कमाई खपाने के लिए ‘खरीद लिए पहाड़’! पूर्वांचल के खनिज क्षेत्रों में भी हुई जबरदस्त निवेशबाज़ी

जब जमीनें भर गईं, तो नजरें टिकीं मिर्जापुर और सोनभद्र के खनिज भंडारों पर। जांच में पता चला है कि जीएसटी विभाग के कुछ प्रभावशाली अधिकारियों ने डोलो स्टोन, सैंड स्टोन और लाइम स्टोन वाले पहाड़ों में रॉयल्टी के नाम पर भारी निवेश किया।

खबर ये भी है कि सिंडिकेट ने ई-टेंडर प्रणाली के तहत खनिज रॉयल्टी के रेट 10 गुना तक बढ़वाए, और फिर वही पहाड़ खरीदकर सालभर में सरेंडर कर दिए। रॉयल्टी के नाम पर सालाना 20–30 करोड़ की रकम का हेरफेर हुआ, और अघोषित आय को खपाने का यह ‘खनन घोटाला’ बड़े स्तर पर फैल चुका है।

 

जनता टैक्स की मार झेल रही, अधिकारी गढ़ रहे अपना ‘संपत्ति साम्राज्य’

जीएसटी के नाम पर एक आम व्यापारी पाई-पाई का हिसाब देने को मजबूर है, नोटिस और पेनल्टी के जाल में फंसा है। लेकिन दूसरी ओर, विभाग के कुछ अफसर उन्हीं पैसों से फार्महाउस, प्लॉट, बंगले, पहाड़ और खदानें खरीदने में मशगूल थे।

ये वही अधिकारी हैं जो सचल दल, एसआईबी, और जांच विंग में लंबे समय तक तैनात रहे, और वर्षों तक ट्रांसफर न होने का भरपूर फायदा उठाया। अब जब जांच की परतें खुल रही हैं, तो विभाग से लेकर शासन तक हड़कंप मचा हुआ है।

इनसेट बॉक्स- 

जांच के मुख्य बिंदु

200 करोड़ से ज्यादा की जमीन और खनिज क्षेत्रों की खरीद में संलिप्त 50+ जीएसटी अधिकारी

11 अधिकारियों के नाम और दस्तावेज जांच एजेंसियों के हाथ लगे

मोहनलालगंज-सुल्तानपुर रोड में भारी निवेश, बिल्डर की भूमिका संदिग्ध

सोनभद्र-मिर्जापुर के खनिज क्षेत्रों में रॉयल्टी के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी

ई-टेंडर सिस्टम में मनमाने रेट तय कर पहाड़ों की खरीद

रजिस्ट्री कार्यालय और खनन विभाग से मांगे गए दस्तावेज

शासन ने उच्चस्तरीय जांच के दिए आदेश

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