वाराणसी में डीएसआर कॉन्क्लेव का आगाज़, धान की खेती में नवाचार पर मंथन
सीधी बुवाई से जल संरक्षण, श्रम की बचत और बढ़ी आमदनी पर हुआ जोर
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी।
अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र, वाराणसी में तीन दिवसीय डी.एस.आर. (धान की सीधी बुवाई) कॉन्क्लेव 2025 का शुभारंभ रविवार 5 अक्टूबर को हुआ। उद्घाटन सत्र में भारत, श्रीलंका, कंबोडिया सहित कई देशों के वैज्ञानिक, नीति निर्माता, कृषि अधिकारी और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
प्रमुख सत्र में इरी की महानिदेशक डॉ. इवोन पिंटो ने कहा, “धान की सीधी बुवाई भविष्य नहीं, वर्तमान की ज़रूरत है। यह जलवायु-स्मार्ट कृषि की दिशा में बड़ा कदम है।” विशेषज्ञों ने बताया कि डी.एस.आर से पानी की खपत 20–40% तक घटती है, श्रम की ज़रूरत कम होती है और मीथेन उत्सर्जन 35–40% तक घट सकता है, जिससे पर्यावरण और किसान, दोनों को फायदा होता है।
भारत, श्रीलंका, कंबोडिया जैसे देशों के अनुभवों से यह साफ हुआ कि मशीनों, उपयुक्त किस्मों और नीति समर्थन के साथ डी.एस.आर को बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब व हरियाणा में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट्स से 20,000 हेक्टेयर से अधिक में लाभकारी परिणाम मिले हैं।
उद्घाटन सत्र में श्रीलंका के कृषि सचिव डी.पी. विक्रमसिंघे, भारत सरकार के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू, उत्तर प्रदेश व ओडिशा के कृषि सचिव, इरी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल रहे।
कार्यक्रम का समापन आइसार्क निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कहा, “डी.एस.आर का सतत विस्तार तभी संभव है जब विज्ञान, नीति और साझेदारी मिलकर काम करें।”










