भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहने वाले ट्रंप के देश में खुद शटडाउन का कहर, हजारों सरकारी कर्मचारी बेरोजगार
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाशिंगटन।
अमेरिका में 10 दिन से जारी सरकारी शटडाउन अब सरकारी कर्मचारियों की नौकरियों पर भारी पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर छंटनी की शुरुआत कर दी है। विभिन्न विभागों में कर्मचारियों को नोटिस मिलने लगे हैं और अनुमान है कि अगर यही हाल रहा तो 4,000 से अधिक सरकारी कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं।
व्हाइट हाउस और बजट ऑफिस की ओर से पुष्टि की गई है कि छंटनी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मैनेजमेंट एंड बजट डायरेक्टर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “कार्यबल में कटौती शुरू हो गई है।”
सबसे ज्यादा असर वित्त विभाग पर पड़ा है, जहां करीब 1,400 नौकरियों पर खतरा है। स्वास्थ्य विभाग से 1,000 और शिक्षा व शहरी विकास मंत्रालयों से भी 400 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी संभावित है।
पहले ऐसे हालात में कर्मचारियों को केवल अनिवार्य छुट्टी पर भेजा जाता था, लेकिन इस बार स्थायी छंटनी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक 75,000 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा सकता है।
इस राजनीतिक गतिरोध के पीछे डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच जारी टकराव है। डेमोक्रेट्स स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी के लिए तत्काल बजट की मांग कर रहे हैं, जबकि ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन इसे खारिज कर रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ बताया था। अब विडंबना यह है कि उनके अपने देश में ही सरकारी तंत्र ठप हो गया है और हजारों अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां संकट में हैं।
डेमोक्रेट्स का कहना है कि इस आर्थिक और सामाजिक संकट के लिए ट्रंप प्रशासन की हठधर्मी राजनीति जिम्मेदार है। वहीं, अमेरिकी जनता भी महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं की गिरती स्थिति को लेकर गुस्से में है।
शटडाउन से संसद भवन ‘कैपिटल हिल’ की गतिविधियां भी ठप हैं और सांसदों के दौरे तक रद्द कर दिए गए हैं। अमेरिकी लोकतंत्र के इस ठहराव ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है।










