जेपी के आदर्शों से प्रेरित राष्ट्र: उपराष्ट्रपति ने सीताब दियारा में दी श्रद्धांजलि
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो सीताब दियारा (बिहार)।
भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 123वीं जयंती पर उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार 11 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव सीताब दियारा पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लोकनायक को “भारतीय लोकतंत्र की आत्मा” और “जनशक्ति के महान उपासक” के रूप में नमन किया।
सारण जिले में स्थित लोकनायक के पैतृक घर और राष्ट्रीय स्मारक का दौरा करते हुए उपराष्ट्रपति ने भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। स्मृति भवन व पुस्तकालय का भ्रमण करते हुए उन्होंने लोकनायक की विचारधारा को भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का पथप्रदर्शक बताया।
जनसभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “जेपी सिर्फ एक नेता नहीं, एक विचार हैं.. जो ‘स्व से ऊपर राष्ट्र’ और ‘राजनीति से ऊपर जनता’ की सोच को दर्शाते हैं।” उन्होंने कहा कि लोकनायक की ‘संपूर्ण क्रांति’ हथियारों की नहीं, विचारों की क्रांति थी, जिसने लोकतंत्र को नया जीवन दिया।
श्री राधाकृष्णन ने अपने युवावस्था के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे 19 वर्ष की उम्र में कोयंबटूर में संपूर्ण क्रांति आंदोलन से जुड़े थे और उस आंदोलन की जड़ें आज भी उन्हें प्रेरणा देती हैं।
उपराष्ट्रपति ने प्रभावती देवी के त्याग को भी याद करते हुए कहा कि उनकी निःस्वार्थ सेवा, जयप्रकाश जी के संघर्ष की छाया रही। उन्होंने आह्वान किया कि “विक्सित भारत @2047” के निर्माण में जेपी के सत्य, न्याय, अहिंसा और जनशक्ति के आदर्शों को आत्मसात करना होगा।
उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता है, और जेपी का जीवन हमें यही सिखाता है कि सच्ची राजनीति सत्ता नहीं, सेवा है।










