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पीड़ित केन्द्रित न्याय प्रणाली एवं महिला सुरक्षा सम्मेलन का भव्य आयोजन

– रॉबर्ट्सगंज में वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं विभिन्न विभागों की गरिमामयी सहभागिता

पूर्वांचल राज्य, जिला संवाददाता, सोनभद्र

सोनभद्र । बुधवार को जनपद सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज स्थित होटल डी0आ0 ड्रीम्स में “पीड़ित केन्द्रित न्याय प्रणाली एवं महिला सुरक्षा सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री से सम्मानित सुनीता कृष्णन उपस्थित रहीं। उनके साथ अहमद अली भी मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पीयूष मोर्डिया (अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन), आर पी. सिंह (पुलिस महानिरीक्षक, विंध्याचल परिक्षेत्र), जिलाधिकारी सोनभद्र बी0एन0 सिंह, अभिषेक वर्मा (पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र), अपर्णा रजत कौशिक (पुलिस अधीक्षक, मीरजापुर), मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालयअनिल कुमार, क्षेत्राधिकारी नगर, रणधीर मिश्रा, समस्त क्षेत्राधिकारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला प्रोवेशन विभाग, वन स्टॉप सेंटर एवं बाल कल्याण समिति के अधिकारीगण सहित वाराणसी जोन के 09 जनपदों के महिला एवं पुरुष अधिकारी/कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया , कार्यक्रम में मुख्य रूप से छात्राओं द्वारा गुरु वन्दना की सांस्कृतिक प्रस्तुति की गई, जनपद में स्थापित 10 मिशन शक्ति केन्द्रों की कार्यप्रणाली एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई, जेंडर बेस्ड वायलेंस एवं ट्रॉमा इन्फॉर्म्ड केयर (पीड़ित केन्द्रित प्रणाली) पर विस्तृत चर्चा की गई, महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम हेतु रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया ।
इस दौरान मुख्य वक्ता डॉ0 सुनीता कृष्णनन ने बताया कि उन्होंने अब तक लगभग 32,000 से अधिक पीड़ित/पीड़िताओं को चाइल्ड हैरेसमेंट, यौन उत्पीड़न एवं मानव तस्करी से मुक्त कराकर न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता एवं त्वरित न्याय की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में महत्वपूर्ण विधिक एवं सामाजिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई जिसमें सम्मेलन के दौरान निम्न प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदान की गई जैसे लिंग एवं सामाजिक लिंग (जेंडर) के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए बताया गया कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जड़ में लैंगिक असमानता एवं सामाजिक पूर्वाग्रह महत्वपूर्ण कारक हैं । महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की प्रकृति, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी, साइबर अपराध आदि के बदलते स्वरूप पर चर्चा की गई । पुलिस, अभियोजन, न्यायालय, विधिक सेवा प्राधिकरण, वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति एवं सामाजिक संस्थाओं की समन्वित भूमिका पर बल दिया गया। पीड़ितों के अधिकार, गोपनीयता, सम्मान एवं न्यायिक प्रक्रिया में सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। भारतीय विधिक ढांचे की प्रमुख विशेषताओं, महिला एवं बाल संरक्षण संबंधी कानूनों की जानकारी दी गई। सेवा प्रदाताओं एवं विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की रणनीति पर बल दिया गया। पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार, पुनः आघात से बचाव एवं मनोवैज्ञानिक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया। प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फॉर्म सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पॉक्सो एक्ट) तथा
प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मेरीज एक्ट के प्रावधानों, दंडात्मक व्यवस्थाओं एवं बाल संरक्षण में उनकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी गई।

– मिशन शक्ति केन्द्रों पर पीड़िताओं के साथ संवेदनशील एवं शालीन व्यवहार पर विशेष जोर

सम्मेलन में महिला आरक्षियों को निर्देशित किया गया कि मिशन शक्ति केन्द्रों पर आने वाली प्रत्येक पीड़िता के साथ सम्मानजनक, गोपनीय एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए। उन्हें विधिक, चिकित्सीय एवं मनोवैज्ञानिक सहायता हर संभव स्तर पर उपलब्ध कराई जाए।
डॉ0 सुनीता कृष्णनन ने कहा कि पीड़ित केन्द्रित न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल अपराध पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़िता को सुरक्षित वातावरण, भावनात्मक सहयोग एवं न्यायिक प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान करना भी है। जनपद सोनभद्र पुलिस महिला सुरक्षा, पीड़ित सम्मान एवं संवेदनशील पुलिसिंग हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा समाज के सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर महिला सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। 

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