Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) देशभर में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित नई संरचना के तहत Uttar Pradesh और Uttarakhand को मिलाकर ‘उत्तर क्षेत्र’ बनाया जाएगा। हालांकि इस बदलाव की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन संघ सूत्रों के अनुसार इसकी रूपरेखा तय कर ली गई है।
मार्च 2027 के बाद लागू होगा नया ढांचा
सूत्रों के मुताबिक यह नया संगठनात्मक ढांचा विधानसभा चुनाव 2027 के बाद मार्च 2027 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। संघ के लिए उत्तर क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इन दोनों राज्यों में शाखाओं और स्वयंसेवकों की संख्या बड़ी है।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बना खाका
हरियाणा के Panipat के समालखा में आयोजित संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के अंतिम दिन इस बदलाव के खाके को अंतिम रूप दिया गया। नई व्यवस्था के तहत पूरे देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में विभाजित किया जाएगा।
क्षेत्र और संभाग स्तर से चलेगा संगठन
नई संरचना में संगठन का फोकस प्रांत के बजाय क्षेत्र और संभाग स्तर पर रहेगा।
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क्षेत्र स्तर पर संगठन के समन्वय और विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा।
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संभाग स्तर पर स्थानीय शाखाओं, प्रशिक्षण और गतिविधियों का संचालन होगा।
यूपी में होंगे 10 संभाग
नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 10 संभाग बनाए जाएंगे। इनमें मेरठ, ब्रज, बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, प्रयागराज, अयोध्या, काशी और गोरखपुर शामिल होंगे। इस बदलाव के बाद मौजूदा प्रांत संरचना समाप्त हो जाएगी।
संगठन को और मजबूत बनाने की तैयारी
संघ सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश हमेशा से संघ का बड़ा कार्यक्षेत्र रहा है। शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से यह राज्य संघ के लिए बेहद अहम है। उत्तराखंड के साथ मिलकर उत्तर क्षेत्र बनाए जाने से संगठन के विस्तार और समन्वय को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नई नियुक्तियों पर अभी रोक
संघ का शताब्दी वर्ष होने के कारण फिलहाल नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी। हालांकि, नए ढांचे को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
संभावित नई जिम्मेदारियां
सूत्रों के मुताबिक ब्रज क्षेत्र के पूर्व प्रांत प्रचारक और मौजूदा सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख Harish Rautela को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाए जाने का प्रस्ताव है। वहीं Manoj Mikhra को पश्चिमी यूपी का क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाए जाने पर भी सहमति बनी है। हालांकि इन नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
संगठनात्मक बदलाव से बढ़ेगी प्रभावशीलता
संघ के इस नए ढांचे का उद्देश्य संगठन के समन्वय, विस्तार और कार्यकुशलता को बढ़ाना है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में संघ की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










