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मिडिल ईस्ट तनाव का असर भारत पर: खाद सप्लाई और कीमतों पर बढ़ सकती है चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो देश में फर्टिलाइजर यानी खाद की सप्लाई और कीमतें दोनों प्रभावित हो सकती हैं। भारत अपनी खाद की जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर यहां देखने को मिल सकता है।

आयात पर निर्भर है भारत

भारत दुनिया के प्रमुख कृषि देशों में से एक है, लेकिन कई महत्वपूर्ण उर्वरकों के लिए उसे अभी भी आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल देश का फर्टिलाइजर आयात करीब 41 प्रतिशत तक बढ़ गया था।

बिजनेस अखबार की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 तक भारत लगभग 9.8 मिलियन टन तैयार उर्वरक आयात कर चुका है। वहीं पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 10.23 अरब डॉलर (लगभग 94 हजार करोड़ रुपये) की खाद विदेशों से खरीदी थी।

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच Strait of Hormuz के बंद होने की आशंकाओं ने चिंता और बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से आने वाले तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर इस रास्ते पर आवाजाही बाधित होती है तो शिपिंग लागत बढ़ सकती है और सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

खाड़ी देशों से आता है बड़ा हिस्सा

भारत मुख्य रूप से यूरिया का आयात Oman, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar जैसे खाड़ी देशों से करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह का तनाव भारत की खाद आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है।

बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद सब्सिडी बिल करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो केंद्र सरकार के कुल सब्सिडी खर्च का 40 प्रतिशत से अधिक है। अगर शिपिंग महंगी होती है या सप्लाई रूट बदलते हैं, तो सरकार पर सब्सिडी का बोझ और बढ़ सकता है।

आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान

विशेषज्ञों के अनुसार 2025-26 में भारत का फर्टिलाइजर आयात करीब 18 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 76 प्रतिशत ज्यादा होगा। वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ही खाद आयात 13.98 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

सरकार की वैकल्पिक रणनीति

भारत में यूरिया का घरेलू उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों के लिए देश अभी भी आयात पर निर्भर है। इसी को देखते हुए भारत ने Russia, Saudi Arabia और Morocco के साथ समझौते कर करीब 86 लाख मीट्रिक टन खाद की सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश की है।

इसके अलावा सरकार अब Indonesia, Belarus, Morocco और Russia से भी आयात बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि मिडिल ईस्ट में तनाव का असर भारत की कृषि व्यवस्था पर कम से कम पड़े।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव केवल ऊर्जा बाजार ही नहीं, बल्कि खाद आपूर्ति और कृषि लागत पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में भारत सरकार वैकल्पिक सप्लाई स्रोत तलाशने और आयात को विविध बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।

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