पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत आधुनिकीकरणाधीन आनंदनगर रेलवे स्टेशन पर 18 लाइसेंसी दुकानदारों की आंखों से लगातार आंसू बह रहे हैं। पिछले लगभग दो साल से विस्थापित ये दुकानदार न्याय की आस में तड़प रहे हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और शासन की ओर से पूर्ण मौन। कई दुकानदार गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि कुछ की तो असमय मौत हो चुकी है। लाइसेंसी दुकानदार होते हुए भी वे डर-डरकर जीवन बिता रहे हैं, रोजगार और आजीविका का कोई ठिकाना नहीं।
दुकानदारों की पुकार: पत्रों की बौछार, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
पीड़ित दुकानदारों ने रेलवे के कई जिम्मेदार अफसरों, एसडीएम, डीएम सहित उच्च अधिकारियों को दर्जनों पत्र और अर्जियां भेजी हैं। उनकी स्पष्ट मांग है- “रेलवे परिसर में उपलब्ध खाली जगहों पर ही हमें वैकल्पिक दुकानें आवंटित कर दी जाएं, ताकि हमारा पारंपरिक व्यवसाय चलता रहे।” लेकिन जवाब में केवल आश्वासन ही मिले। अमृत भारती जैसे दुकानदार ने बताया, “हम अमृत भारत स्टेशन के विकास का स्वागत करते हैं, लेकिन हमारा पुनर्वास क्यों नहीं? सत्ता के लोग, प्रशासन और शासन सब मौन हैं।”
परिवारों पर संकट: पढ़ाई छूटी, फीस का अभाव
इस विस्थापन ने दुकानदार परिवारों को गहरे संकट में धकेल दिया है। सभी बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। मैट्रिक तक की फीस जमा करने की स्थिति ही नहीं। एक दुकानदार पिता बोले, “बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। सरकार का यह रवैया अकल्पनीय है। कुछ तो बोलिए!” दुकानदारों ने चेतावनी दी, “आने वाले चुनावों में इसका हिसाब लिया जाएगा।”
अन्य स्टेशनों से तुलना: आनंदनगर ही क्यों सबसे बदनसीब?
दुकानदारों का सवाल गंभीर है- “अमृत भारत योजना के तहत कई अन्य स्टेशनों पर दुकानें बरकरार हैं या पुनर्वास हो गया। केवल आनंदनगर के साथ ऐसा भेदभाव क्यों? हम अर्जियां देते-देते थक चुके हैं।” महराजगंज जिले के इस मामले ने स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों का ध्यान खींचा है। उन्होंने रेलवे और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
अमृत भारत स्टेशन का विकास तो हो रहा है, लेकिन दुकानदारों की जिंदगी रुक सी गई है। क्या जल्द न्याय मिलेगा, या आंसू ही बहते रहेंगे?
अमृत भारत स्टेशन आनंदनगर: दुकानदारों का दो साल पुराना दर्द, प्रशासन की उदासीनता










