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चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के साथ ही अखंड ज्योत जलाई जाती है इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है…जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

वाराणसी श्री काशी सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने सभी प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का प्रतीक होता है। हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है और नवमी तक यह पर्व चलता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और प्रत्येक दिन उन्हें विशेष भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि हर देवी को उनके प्रिय भोग अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ ही अखंड ज्योत भी जलाई जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर देवी मां की कृपा भी बरसती है। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि के दिन राम नवमी का त्यौहार भी मनाया जाता है।

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