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सोनभद्र जिला कारागार में ‘बैठकी’ के नाम पर अवैध वसूली, कैदियों के शोषण के गंभीर आरोप

पूर्वांचल राज्य संवाददाता: दीपू तिवारी

गुरमा (सोनभद्र) स्थानीय जिला कारागार से सामने आए गंभीर आरोपों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, जेल के भीतर कैदियों से सुनियोजित तरीके से अवैध धन उगाही, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। इस पूरे मामले में कुछ अधिकारियों के साथ “राइटर” कहे जाने वाले बंदियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
बैठकी” के नाम पर संगठित वसूली
जानकारी के मुताबिक, बैरक नंबर 4 सहित अन्य बैरकों में कैदियों से “बैठकी” के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं।
सामान्य कैदियों से ₹3000 से ₹5000 तक
गंभीर धाराओं (POCSO, धारा 302 आदि) में बंद कैदियों से ₹10,000 या उससे अधिक
सूत्रों के अनुसार, यह रकम कैदी की सजा की अवधि और मामले की गंभीरता के आधार पर तय की जाती है।
बताया जा रहा है कि “राइटर मोरिया” नामक बंदी इस वसूली तंत्र में सक्रिय भूमिका निभाता है और अन्य बंदियों के साथ मिलकर इसे संचालित करता है।
सरकारी भोजन बनाम प्राइवेट कैंटीन
जेल के अंदर भोजन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर अंतर सामने आया है:
कैदियों को सरकारी व्यवस्था के तहत घटिया गुणवत्ता का भोजन दिए जाने का आरोप है
वहीं, जेल परिसर में चल रही कथित प्राइवेट कैंटीन में ₹50 प्रति आइटम (दाल, सब्जी, चावल, रोटी) के हिसाब से बेहतर भोजन उपलब्ध कराया जाता है
इससे यह सवाल उठता है कि क्या कैदियों को बेहतर भोजन के लिए अतिरिक्त भुगतान करने को मजबूर किया जा रहा है।
पैसे न देने पर प्रताड़ना
आरोप है कि जो कैदी पैसे देने से इनकार करते हैं, उनके साथ:
मारपीट की जाती है
मानसिक दबाव बनाया जाता है
जबरन मजदूरी कराई जाती है
बार-बार बैरक बदलकर परेशान किया जाता है
उन्हें धमकी दी जाती है कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो जेल में उनका रहना कठिन कर दिया जाएगा।
मुलाकात के दौरान भी वसूली
कैदियों से मिलने आने वाले परिजनों से भी कथित रूप से वसूली की जाती है:
गेट पर ₹50
अंदर प्रवेश पर ₹100–₹150
बैरक नंबर 4 में अतिरिक्त ₹150 तक एक व्यक्ति से लिया जाता है
इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
हर बैरक में फैला नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, यह वसूली पूरे जेल में एक संगठित नेटवर्क के रूप में फैली हुई है:
हर 10 दिन में या बैरक बदलने पर दोबारा वसूली
नए कैदियों को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है
“काम से छूट” या “सुविधा” के नाम पर पैसे लिए जाते हैं
भोजन की खराब गुणवत्ता पर सवाल
कैदियों ने भोजन को लेकर गंभीर शिकायतें की हैं:
घटिया चावल
पतली दाल
खराब या सड़ी सब्जी
बताया जा रहा है कि यह भोजन स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
जांच से पहले ‘मैनेजमेंट’ का आरोप
सूत्रों का कहना है कि जब उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण की सूचना मिलती है:
पहले से जानकारी लीक हो जाती है
कैदियों को चुप रहने के लिए कहा जाता है
वास्तविक स्थिति छिपा दी जाती है
प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में जेलर और डिप्टी जेलर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है या उनकी कथित मिलीभगत से—यह निष्पक्ष जांच का विषय है।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:
उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराई जाए
दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
कैदियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
जेल व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए

यह मामला केवल एक जेल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कारागार तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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