पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। महर्षि भृगु की पावन धरा पर स्थित महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। समस्त धर्म प्रेमियों के सौजन्य से चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तीसरे दिन वैदिक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। यज्ञ के तृतीय दिवस पर प्राचीन पद्धति अपनाते हुए अरणी मंथन किया गया। लकड़ियों के घर्षण से अग्नि प्रकट कर अग्निस्थान में होम आहुतियां प्रदान की गईं। वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ और स्वाहा की गूँज से वातावरण अत्यंत दिव्य हो गया। सायंकाल के समय माँ गंगा की भव्य महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। आरती के दृश्य ने काशी के घाटों की भव्यता की याद दिला दी। इस अवसर पर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। आचार्य मोहित पाठक का संकल्प: “अब काशी यही है” आरती अर्चक श्रीअतुल ने आचार्य मोहित पाठक के सत्संकल्पों की चर्चा करते हुए उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा ”आचार्य श्री का संकल्प इस स्थान को ‘भृगु काशी’ के रूप में पूर्णतः विकसित करना है। आने वाले समय में भक्तों को केवल बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी जाना होगा, बाकी सभी आध्यात्मिक अनुष्ठान और सुविधाएँ इसी भृगु क्षेत्र के गुरुकुलम में उपलब्ध होंगी।”श्री राम कथा की अमृत वर्षा महायज्ञ के साथ आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिन आचार्य ने प्रभु राम के आदर्श चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राम का जीवन हमें मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है।
भृगु क्षेत्र में भृगु काशी का उदय महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम में अरणी मंथन के साथ महायज्ञ का तृतीय दिवस संपन्न










