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महिलाओं की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले तथाकथित ज्योतिषियों और ढोंगी बाबाओं का अंग भंग करे सरकार… जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

श्री काशी सुमेरु पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले तथाकथित ज्योतिषियों और ढोंगी बाबाओं के खिलाफ कड़ी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने विशेष रूप से महाराष्ट्र में सामने आए एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ अत्यंत कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए और भविष्य में कोई भी व्यक्ति धर्म या ज्योतिष के नाम पर इस प्रकार की घृणित हरकत करने का साहस न कर सके।
शंकराचार्य महाराज ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानव कल्याण और नैतिकता पर आधारित है। लेकिन कुछ लोग अंधविश्वास फैलाकर भोले-भाले लोगों, खासकर महिलाओं को अपना शिकार बनाते हैं। उन्होंने इस प्रवृत्ति को समाज के लिए अत्यंत खतरनाक बताया और कहा कि ऐसे लोगों की वजह से सनातन परंपरा और धार्मिक मान्यताओं की छवि भी धूमिल होती है। उनके अनुसार, ज्योतिष और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का उद्देश्य लोगों को सही दिशा देना है, न कि उनकी कमजोरियों का लाभ उठाना।
उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि केवल सामान्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम दंड का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे लोगों को सख्त सजा मिलेगी तो समाज में एक मजबूत संदेश जाएगा और अंधविश्वास के नाम पर हो रहे शोषण पर अंकुश लगेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है, और जो भी व्यक्ति इसे ठेस पहुँचाने का प्रयास करता है, वह किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं हो सकता।
शंकराचार्य महाराज ने समाज से भी जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोग किसी भी तथाकथित ज्योतिषी या बाबा के पास जाने से पहले उसकी सत्यता और विश्वसनीयता की जांच करें। उन्होंने माता-पिता और परिवारों को भी सलाह दी कि वे महिलाओं और युवतियों को जागरूक करें, ताकि वे किसी भी तरह के बहकावे में न आएं। उन्होंने शिक्षा और विवेक को अंधविश्वास से मुक्ति का सबसे प्रभावी उपाय बताया।
उन्होंने आगे कहा कि धर्म का अर्थ भय पैदा करना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास जगाना है। जो व्यक्ति डर दिखाकर या चमत्कार का लालच देकर किसी को प्रभावित करता है, वह धर्म का सच्चा प्रतिनिधि नहीं हो सकता। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं और संत समाज से भी अपील की कि वे ऐसे मामलों में खुलकर सामने आएं और समाज को सही दिशा दें।
अंत में शंकराचार्य महाराज ने कहा कि महिलाओं का सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान है। यदि कोई इस सम्मान के साथ खिलवाड़ करता है, तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कदम उठाना ही न्यायसंगत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे अपराधों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे, जिससे लोगों का विश्वास कायम रहे और धर्म की पवित्रता बनी रहे।

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