वाराणसी में बुधवार को महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासी गर्मी तेज हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा ने “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” निकालकर विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
📍 क्या हुआ?
शहर के नई सड़क इलाके से शुरू हुई पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं। हाथों में तख्तियां और नारों के साथ यह जुलूस लहुराबीर चौराहे तक पहुंचा, जहां राहुल गांधी और अखिलेश यादव के पुतले फूंके गए।
🎯 विरोध की वजह
प्रदर्शन का मुख्य कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) का लोकसभा में पारित न हो पाना रहा। भाजपा महिला मोर्चा ने इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकारों के साथ राजनीति की गई है।
🗣️ क्या बोलीं नेता?
भाजपा काशी क्षेत्र की क्षेत्रीय मंत्री पूजा दीक्षित ने कहा कि महिला आरक्षण कोई साधारण विधेयक नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का बड़ा कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा ने इस महत्वपूर्ण मौके को रोक दिया।
🏛️ विधेयक का संदर्भ
यह विधेयक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने से जुड़ा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे लंबे समय बाद आगे बढ़ाया, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते यह पारित नहीं हो सका।
📊 राजनीतिक असर
इस मुद्दे ने एक बार फिर महिला वोट बैंक को लेकर सियासी बहस तेज कर दी है। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण का मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
🔥 आगे क्या?
भाजपा महिला मोर्चा ने ऐलान किया है कि यह “जन आक्रोश पदयात्रा” सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाई जाएगी, ताकि जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
📌 निष्कर्ष:
वाराणसी में निकली यह पदयात्रा साफ संकेत दे रही है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा चुनावी और राजनीतिक एजेंडा बनने जा रहा है।










