वाराणसी इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान ने पिछले डेढ़ दशक के रिकॉर्ड को चुनौती दे दी है। सुबह 7 बजे के बाद ही सूरज की तेज तपिश लोगों को झुलसाने लगती है और हालात ऐसे हैं कि घाटों पर सुबह 9 बजे तक सन्नाटा छा जाता है।
🌡️ तापमान ने तोड़े रिकॉर्ड
काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित मौसम विभाग के अनुसार, 25 और 26 अप्रैल को अधिकतम तापमान 46°C तक पहुंच सकता है। इससे पहले अप्रैल 2019 में 45.3°C दर्ज किया गया था, जो अब टूटने की कगार पर है।
🛕 मंदिरों में बदले इंतजाम
भीषण गर्मी का असर मंदिरों तक पहुंच गया है।
लोहटिया स्थित राम जानकी मंदिर में पुजारी देवेंद्र नाथ चौबे ने बताया कि भगवान को गर्मी से बचाने के लिए कूलर और AC लगाए गए हैं।
भगवान को सूती वस्त्र पहनाए जा रहे हैं और प्रसाद में मौसमी फल चढ़ाए जा रहे हैं।
🔱 बाबा विश्वनाथ का विशेष जलाभिषेक
काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ का जलधारी (फव्वारा) के जरिए गंगा जल से निरंतर अभिषेक किया जा रहा है।
मंदिर के अर्चक श्रीकांत के अनुसार, यह व्यवस्था अक्षय तृतीया से शुरू होकर सावन पूर्णिमा तक जारी रहती है।
🙏 आस्था और परंपरा का संगम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान पर मौसम का प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन भक्त अपनी आस्था के अनुसार हर मौसम में विशेष व्यवस्थाएं करते हैं। यह परंपरा भक्त और भगवान के बीच गहरे प्रेम और समर्पण को दर्शाती है।
⚠️ जनजीवन पर असर
- सुबह से ही तेज धूप और लू के थपेड़े
- घाटों और सड़कों पर कम भीड़
- टूरिस्ट और स्थानीय लोग गर्मी से परेशान
- स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़े
📌 निष्कर्ष
वाराणसी में बढ़ती गर्मी ने जहां जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं धार्मिक परंपराओं में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिरों में भगवान के लिए विशेष इंतजाम आस्था और बदलते मौसम दोनों की झलक पेश कर रहे हैं।










