उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध अब तेज़ होता जा रहा है। आगरा और फिरोजाबाद समेत कई शहरों में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया, जहां सैकड़ों महिलाएं अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़कर बिजली विभाग के दफ्तर पहुंचीं और विरोध में उन्हें फेंक दिया।
⚡ क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर तेजी से रीडिंग बढ़ा रहे हैं और बिजली बिल अचानक अधिक आ रहा है। कई लोगों का कहना है कि बिजली कटने के बाद भी मीटर यूनिट दिखा रहे हैं। इससे नाराज़ होकर लोगों ने सामूहिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
🗣️ राजनीति भी गरमाई
इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा— “जनता ने चोरी पकड़ ली है”। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी पकड़ता दिख रहा है।
👩👩👧👦 सड़कों पर उतरी महिलाएं
कई इलाकों में महिलाएं सिर पर स्मार्ट मीटर रखकर जुलूस के रूप में बिजली विभाग के दफ्तर पहुंचीं। उन्होंने नारेबाजी करते हुए मीटरों को दफ्तर परिसर में फेंक दिया और पुराने मीटर वापस लगाने की मांग की।
⚠️ प्रशासन की प्रतिक्रिया
बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर पारदर्शी और आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं, और उपभोक्ताओं की शिकायतों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जहां भी गड़बड़ी पाई जाएगी, कार्रवाई होगी।
📊 क्या हैं मुख्य आरोप?
- मीटर की रीडिंग सामान्य से ज्यादा
- बिजली कटने पर भी यूनिट बढ़ना
- बिलिंग में पारदर्शिता की कमी
- शिकायतों पर धीमी कार्रवाई
🧭 आगे क्या?
इस विरोध के बाद राज्य सरकार और बिजली विभाग पर दबाव बढ़ गया है। अगर समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और बड़े स्तर पर फैल सकता है।
📌 निष्कर्ष
स्मार्ट मीटर योजना जहां डिजिटल सुधार की दिशा में कदम है, वहीं जमीनी स्तर पर आ रही शिकायतें इसे विवाद का मुद्दा बना रही हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।










