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बाबा विश्वनाथ की नगरी में जुए का जाल

कृष्णा पंडित की कलम से✍🏻

धर्म, आस्था और अध्यात्म की नगरी काशी आज एक ऐसे अवैध कारोबार की गिरफ्त में दिखाई दे रही है, जो न केवल कानून को चुनौती दे रहा है बल्कि समाज की जड़ों को भी खोखला कर रहा है। बाबा विश्वनाथ की नगरी, जहां हर गली में “हर-हर महादेव” की गूंज सुनाई देती है, वहीं कई इलाकों में जुए और सट्टे का जाल युवाओं से लेकर परिवारों तक को अपनी गिरफ्त में लेने की चर्चाएं तेज है !

जुआ केवल पैसों का खेल नहीं, बल्कि यह परिवारों की आर्थिक बर्बादी

अपराधों में बढ़ोतरी और सामाजिक विघटन का कारण बनता है। आसान कमाई की लालच में युवा अपनी मेहनत, भविष्य और परिवार की उम्मीदों को दांव पर लगाते हुए कई मामलों में कर्ज, विवाद, चोरी, मारपीट और अन्य अपराधों की जड़ में जुए की लत देखने को मिल रही है !

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कहीं खुलेआम या संगठित रूप से अवैध जुआ संचालित हो रहा है, तो इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस तक क्यों नहीं पहुंचती ? यदि जानकारी है तो कार्रवाई कितनी प्रभावी है?

वाराणसी कमिश्नरेट में कई थाना क्षेत्र अंतर्गत जुए का संचालन बेखौफ हो रहा है जैसे जैतपुरा, लंका, सिगरा, कैंट, रोहनिया, मंडुवाडीह के कई इलाके में फैला है कारोबार और सौदागर कोई और नहीं बल्कि नामी गिरामी बहरूपिया और वर्दी में खड़ा सिस्टम का सिपाही है

अलईपुरा स्थित एक अस्पताल के पीछे बंगाली दादा के घर में अंदर और सिटी रेलवे स्टेशन के सामने स्थित गली के अंदर लंबे समय से चल रहा है लाखों के जुए का फड़….

चेतगंज में बहुत ही विख्यात महाराज जी. और लंका नरोत्तम पुर में पार्षद समेत कई वीआईपी और सिगरा में भी वही बहरूपिया, कैंट में कई राज घराने से पनपे पंचर गैंग राजा बाबू और मंडुवाडीह में कई जगह फड़ बना है रोहनिया पटा पड़ा है जुए के कारोबार से…. और साहेब ने टीम गठित कर दिया है सब ठीक देंगे वर्षों से

काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत, संस्कृति और सभ्यता से है! ऐसी नगरी में यदि अवैध गतिविधियां पनपती हैं, तो इसका असर केवल कानून-व्यवस्था पर नहीं बल्कि शहर की प्रतिष्ठा पर भी पड़ता है ! जरूरत इस बात की है कि समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाए ! अभिभावक युवाओं पर नजर रखें, नागरिक संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को दें और कानून लागू करने वाली एजेंसियां निष्पक्ष एवं निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करें !

बाबा विश्वनाथ की नगरी को जुए, सट्टे और अन्य अवैध गतिविधियों से मुक्त रखना केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है! काशी की पहचान अपराध नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सदाचार से होनी चाहिए ! जब कानून का भय और समाज का सहयोग साथ होगा, तभी बाबा विश्वनाथ की नगरी अपनी गरिमा और पवित्रता के अनुरूप सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाए रख सकेगी ! 

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