प्रतापगढ़; समाज कल्याण अधिकारी ने की आत्महत्या, पारिवारिक तनाव से थे परेशान
क्या पत्नी की प्रताड़ना बनी आत्महत्या की वजह?
घरेलू हिंसा में पत्नी ही नहीं, पति भी दे सकता है जान?
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो प्रतापगढ़।
वरिष्ठ संवादाता (राजेश कुमार वर्मा)
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। आज़मगढ़ में तैनात जिला समाज कल्याण अधिकारी आशीष कुमार सिंह (40) ने अपने पैतृक गांव पूरे केशवराय में अपने घर के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि यह कदम उन्होंने पत्नी से फोन पर हुए विवाद के बाद उठाया।
जीवन की उपलब्धियाँ और अंत का दर्द
आशीष कुमार सिंह बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थे। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में अपनी पहली नौकरी शुरू की थी। दो वर्ष पूर्व उन्होंने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर समाज कल्याण अधिकारी के पद पर नियुक्ति पाई थी। उनका विवाह सुल्तानपुर निवासी क्षमता सिंह से लगभग दस वर्ष पूर्व हुआ था, और उनका एक पाँच वर्षीय पुत्र भी है।
आखिरी बातचीत और आत्मघाती निर्णय
बताया जा रहा है कि आशीष सिंह छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे और गुरुवार सुबह आज़मगढ़ लौटने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उनकी पत्नी, जो पिछले कुछ महीनों से मायके में रह रही थीं, ने उन्हें फोन किया। बातचीत के बाद वह अपने कमरे में चले गए और काफी देर तक बाहर न निकलने पर परिजनों ने दरवाजा तोड़ा, जहां उनका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला।
वहीं पति के आत्महत्या की खबर मिलते ही पत्नी क्षमता सिंह बेटे के साथ ससुराल प्रतापगढ़ पहुंचीं, लेकिन ससुरालवालों ने बेटे को लेकर पत्नी को लौटा दिया। उनको अंतिम संस्कार में भाग लेने से मना कर दिया।
सवाल जो समाज से पूछे जाने चाहिए
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पुरुषों की मानसिक और भावनात्मक पीड़ा को समाज में पर्याप्त गंभीरता से लिया जाता है? महिलाओं के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाएं हैं, जो उनके अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा करती हैं। लेकिन क्या पुरुषों के लिए भी कोई ऐसा मंच है, जहाँ वे अपनी पीड़ा साझा कर सकें?
क्या पुरुष समाज को भी एक ऐसा आयोग नहीं मिलना चाहिए, जो उनकी समस्याओं, घरेलू प्रताड़ना और मानसिक तनाव की सुनवाई कर सके? क्या हम ऐसे ही संवेदनशील पुरुषों को खोते रहेंगे, जिनकी आवाज़ कभी सुनी ही नहीं गई?
यह सिर्फ एक खबर नहीं, एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक तनाव किसी भी व्यक्ति को तोड़ सकता है… चाहे वह महिला हो या पुरुष। अब वक्त है कि हम सभी के लिए समान संवेदनशीलता और समर्थन की बात करें।










