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सर्पदंश से युवक की मौत, परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप

सर्पदंश से युवक की मौत, परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप

धरसौना-सिंधोरा मार्ग व थाने के सामने किया दो घंटे तक प्रदर्शन, फिर भी चिकित्सक के खिलाफ तहरीर नहीं – आखिर क्यों?

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी।
चोलापुर थाना क्षेत्र के रजला (नियारडीह) गांव में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 21 वर्षीय युवक आदित्य कुमार (उर्फ छोटू) की सर्पदंश से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही और पैसे की मांग को लेकर हुई देरी के चलते युवक की जान गई। इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों व परिजनों ने धरसौना-सिंधोरा मार्ग और बाद में थाने के बाहर वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग को कुछ देर के लिए जाम कर लगभग 2 घंटे हंगामा किया।

परिजनों के अनुसार, रात करीब 2 बजे सोते समय आदित्य को जहरीले सर्प ने कान के पास काट लिया। तत्काल उसे पास के निजी चिकित्सालय – बद्रीनाथ पाल क्लीनिक, धरसौना ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने इलाज शुरू करने से पहले 80,000 रुपये की मांग रख दी। किसी तरह परिजनों ने पहले 20,000 रुपये और इलाज शुरू होने के बाद दो बार में कुल 60,000 रुपये की व्यवस्था कर भुगतान किया।

परिजनों का आरोप है कि पहली किस्त मिलने तक चिकित्सक ने इलाज शुरू नहीं किया और इस दौरान घंटों बीत गए। समय पर इलाज न मिलने के कारण आदित्य की हालत और बिगड़ती गई। सुबह करीब 7:30 बजे चिकित्सक ने परिजनों को यह कहते हुए युवक को कहीं और ले जाने को कहा कि नर्सिंग होम में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कुछ ही देर बाद युवक ने दम तोड़ दिया।

घटना की खबर फैलते ही गांव से सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष धरसौना स्थित क्लीनिक पहुंच गए और शव को डॉक्टर के घर के सामने रखकर धरसौना-सिंधोरा मार्ग को जाम कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख चिकित्सक ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची चोलापुर पुलिस के समझाने-बुझाने पर परिजन शव को लेकर थाने पहुंचे, लेकिन वहां भी परिजनों का गुस्सा थम नहीं सका। थाने के गेट के सामने वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग को भी कुछ देर तक जाम कर दिया गया।

थाना प्रभारी योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि परिजनों को शांत कर शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

अब सवाल यह उठता है कि..

यदि इलाज में लापरवाही हुई थी, तो चिकित्सक के खिलाफ तहरीर क्यों नहीं दी गई?

जब मुख्य सड़क कुछ देर तक जाम कर दो घंटों तक प्रदर्शन हुआ, तो विधिक कार्रवाई की मांग क्यों नहीं उठाई गई?

क्या यह किसी दबाव या समझौते का परिणाम है?

 

इन तमाम सवालों ने ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के मन में संदेह की स्थिति पैदा कर दी है। वहीं, युवक की मौत और इलाज के बदले मोटी रकम की मांग ने एक बार फिर निजी चिकित्सालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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