ट्रंप चूके, मचाडो को मिला नोबेल शांति पुरस्कार
तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई को मिला वैश्विक सम्मान
सोशल मीडिया पर ट्रंप को लेकर मीम्स की बौछार, एक यूजर बोला.. “दिल के अरमां दिल में ही रह गए!”
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, ओस्लो।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार से चूक गए हैं। इस साल यह प्रतिष्ठित सम्मान वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान किया गया है। नोबेल समिति ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा की।
लोकतंत्र की लौ के लिए मिला सम्मान
नोबेल समिति ने मचाडो को यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकारों की वकालत, और तानाशाही से शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन के लिए दिए गए उनके प्रयासों के चलते दिया है। समिति अध्यक्ष जोर्गेन वाटने फ्राइडनेस ने उन्हें “शांति की साहसी और अडिग समर्थक” बताया, जिन्होंने “तानाशाही के अंधकार में भी लोकतंत्र की रोशनी बुझने नहीं दी।”
ट्रंप की दावेदारी धरी रह गई
इस साल का शांति पुरस्कार पहले से ही चर्चाओं में था क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने वाला नेता बताते हुए अपने नाम की सार्वजनिक पैरवी की थी। हालांकि, नोबेल समिति ने बिना किसी नाम का उल्लेख किए कहा कि वह हर साल हजारों नामांकन पर विचार करती है और निष्पक्ष निर्णय लेती है।
सोशल मीडिया पर ट्रंप बने मीम्स का शिकार
नोबेल से चूकने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रंप को लेकर मजाक उड़ने लगा। ट्विटर (अब X) और इंस्टाग्राम पर मीम्स की बाढ़ सी आ गई। एक यूजर ने व्यंग्य करते हुए लिखा, “डोनाल्ड ट्रंप की दिल के अरमां, दिल में ही रह गए!” वहीं, कई यूजर्स ने मचाडो की जीत को लोकतंत्र की जीत बताया।
कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो?
कराकास में जन्मी मचाडो एक इंजीनियर, मानवाधिकार कार्यकर्ता और तेजतर्रार विपक्षी नेता हैं। उन्होंने चुनाव पारदर्शिता के लिए ‘स्मेट’ नामक संगठन की सह-स्थापना की और बाद में ‘वेंटे वेनेजुएला’ पार्टी की नींव रखी। मचाडो लंबे समय से ह्यूगो शावेज और निकोलस मादुरो की सरकारों की कड़ी आलोचक रही हैं और वेनेजुएला में लोकतंत्र की वापसी की मुखर आवाज बन चुकी हैं।
नोबेल शांति पुरस्कार की भूमिका
यह पुरस्कार हर वर्ष उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर शांति, मानवाधिकार और लोकतंत्र को बढ़ावा देने में विशेष योगदान दिया हो। इसकी घोषणा अक्टूबर में होती है और यह नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा प्रदान किया जाता है।
यह सम्मान न केवल मचाडो की व्यक्तिगत जीत है, बल्कि वेनेजुएला के उन सभी नागरिकों की भी, जो लोकतंत्र की उम्मीदों को अब भी ज़िंदा रखे हुए हैं।










