2040 में भारतीय चांद पर होंगे: इसरो ने तय किया नया लक्ष्य
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो रांची।
भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण की दौड़ में एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया है। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने ऐलान किया है कि 2040 तक भारतीयों को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य तय किया गया है। ‘गगनयान’ मानव मिशन की शुरुआत 2027 से होगी, जिसकी पहली उड़ान 2025 के अंत तक मानवरहित रूप में भेजी जाएगी।
बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची में आयोजित कार्यक्रम में इसरो प्रमुख ने बताया कि 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और वीनस मिशन, चंद्रयान-4 और 5, अगला मंगल अभियान, और एक नई खगोलीय वेधशाला इसरो की प्राथमिक योजनाओं में शामिल हैं।
नारायणन ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित रोडमैप के बाद इसरो आत्मनिर्भर और सशक्त अंतरिक्ष राष्ट्र बनने की ओर साहसिक कदम बढ़ा रहा है।”
*’आदित्य’ से सूर्य की पहेली सुलझा रहा भारत*
भारत का आदित्य-एल1 मिशन अब तक 15 टेराबिट से अधिक सौर डाटा भेज चुका है। यह सौर तूफानों, कोरोना विस्फोट और अंतरिक्ष मौसम के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
*300 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स का उभार*
निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भागीदारी से भारत का स्पेस इकोसिस्टम दुनिया के लिए मिसाल बन रहा है। इसरो की मदद से अब 300 से अधिक भारतीय स्टार्टअप्स उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाओं और डाटा एनालिटिक्स में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
*एआई-रोबोटिक्स का होगा स्पेस मिशनों में दबदबा*
नारायणन ने कहा कि “जैसे कंप्यूटर क्रांति ने दुनिया बदल दी, वैसे ही एआई और रोबोटिक्स भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की दिशा तय करेंगे।” गगनयान में ‘व्योममित्रा’ नाम की अर्ध-मानव रोबोट भी शामिल होगी।
*पेलोड क्षमता में जबरदस्त छलांग*
“कभी हम 35 किलो पेलोड भेजते थे, अब 80,000 किलो तक पेलोड ले जाने की योजना है,” नारायणन ने कहा। यह इसरो की विकास गाथा और भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण है।
*भारत: अंतरिक्ष में नई क्रांति की ओर*
चंद्रमा पर पानी की खोज से लेकर दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग तक, भारत ने दुनिया को दिखाया है कि विज्ञान, संकल्प और नेतृत्व के बल पर अंतरिक्ष भी भारतीय कदमों के आगे झुक सकता है।










