चुनावी परिणाम पर गंभीर आत्ममंथन—जितेंद्र यादव ने समर्थकों संग तय की अगली दिशा
शिवनगर खुश्कीबाग आवास पर आयोजित समीक्षा बैठक में उठे बूथ स्तर की चुनौतियाँ, प्रलोभन की चर्चाएँ और भीतरघात के संकेत—‘लड़ाई लंबी है, कारवां नहीं रुकेगा’
पूर्णिया/ डॉ.रूद्र किंकर वर्मा.
विधानसभा चुनाव 2025 में सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 62 पूर्णिया महागठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी रहे जितेंद्र यादव ने सोमवार को अपने शिवनगर खुश्कीबाग स्थित आवास पर विस्तृत समीक्षा बैठक की। इसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों से आए गणमान्य नागरिक, पंचायत प्रतिनिधि, युवा कार्यकर्ता, व्यावसायिक वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया। उद्देश्य—हार के कारणों की पहचान, संगठनात्मक कमियों का आकलन और भविष्य की राजनीतिक रणनीति तैयार करना।
बैठक में उपस्थित लोगों ने क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत, बूथवार परिणामों तथा मतदाता रुझान पर तथ्यात्मक चर्चा की। कई प्रतिभागियों ने कहा कि जमीन पर बेहतर जनसंपर्क और मजबूत समर्थन के बावजूद कुछ बूथों पर अप्रत्याशित मतदान परिणाम आए, जो गहन अध्ययन की मांग करते हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए यादव ने कहा, “आप सभी का यहां उपस्थित होना सिर्फ राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। चुनाव में जीत-हार दोनों संभावनाएँ होती हैं, लेकिन परिणाम चाहे जो भी हो, उसका ईमानदार विश्लेषण आवश्यक है।” उन्होंने समर्थकों की प्रतिबद्धता की तुलना “कृष्ण जैसा साथ” से करते हुए कहा कि यह भावनात्मक और नैतिक पूँजी जीवनभर याद रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि पूर्णिया में भाजपा उम्मीदवार के प्रति शिकायतें और असंतोष चर्चा का विषय थे, इसलिए परिणाम चौंकाने वाले साबित हुए। कई कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई कि चुनाव से पहले बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक प्रलोभन दिए गए, जिससे रुझान प्रभावित हो सकता है। यादव ने कहा, “हम आरोप लगाने के पक्ष में नहीं, परंतु जो दिखता है, उसे नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता। कई मजबूत बूथों पर विपक्ष को उम्मीद से अधिक वोट मिलना प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।”
कार्यकर्ताओं ने संगठन को बूथ स्तर पर और मजबूत करने, युवाओं को जिम्मेदारी देने, डिजिटल संचार बढ़ाने और ग्रामीण जनसंवाद विस्तार पर जोर दिया। यादव ने स्पष्ट किया कि यह हार अंत नहीं—“यह शुरुआत है। सोच, रणनीति और एकजुटता के साथ आगे बढ़ेंगे। जनता के विश्वास, प्रेम और समर्थन के रहते भविष्य की जीत निश्चित है।”
उन्होंने समर्थकों से संयम, धैर्य और जनता के बीच सतत उपस्थित रहने का आग्रह किया। अंत में उन्होंने कहा, “जिन्होंने वोट दिया—उनका आभार; जिन्होंने नहीं दिया—उनका भी स्वागत। लोकतंत्र में दरवाजे बंद नहीं होते।”










