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मसाने की होली को गृहस्थ लोगों के लिए निसिद्ध, वीभत्स व अमानवीय , प्रशासन रोक लगाए .. जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

श्री काशी सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने मसाने की होली को गृहस्थ लोगों के लिए निसिद्ध बताते हुए गृहस्थ लोग कभी शमशान में होली नहीं मनाते थे, किसी भी पुराण में चिताभस्म होली का वर्णन कही नहीं आता है, यह अत्यंत घृणित व संस्कृति पर आघात है,
अतः प्रशासन से अनुरोध है की ऐसे आयोजन को तत्काल रोक लगाए, और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करें
वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही समाजिक वा आध्यात्मिक संस्था शिव बारात समिति के संयोजक वरिष्ठ समाजसेवी दिलीप सिंह ने शमशान की होली के संदर्भ में अपनी राय बताते हुए कहा कि
इस समय काशी में मशाने की होली के नाम पर जो नग्नता ,अश्लीलता,मादकता व वैमनस्यता फैलाई जा रही है या काशी के सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत घातक साबित होती जा रही है, चिता भस्म की होली सांसारिक लोगों के लिए नहीं है , मुझे लग रहा है कि प्रशासन किसी अनहोनी घटना का इंतजार कर रहा है उसके बाद ही इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा घाटों पर मसाने की होली के नाम पर जहां पर कपड़े फाड़े जाते हो, चप्पल लहराई जाती हो, तरह तरह के नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है, भीड़ में महिलाओं से अश्लीलता की सभी हदें पार हो जाती हो, यह अत्यंत घृणित एवं असभ्य समाज का परिचय देती है
वाराणसी विशेश्वरगंज स्थित वाराणसी किराना व्यापार समिति के उपाध्यक्ष वरिष्ठ व्यापारी नेता अशोक कसेरा बताते हैं कि
चिता भस्म होली सनातन धर्म के विरूध्द है किसी भी शास्त्र में ये नही वर्णित है 6 शास्त्र ,18 पुराण ,4 वेद कहीं भी नही वर्णित है की चिता की राख से होली खेला जाय कुछ लोग अपनी दुकानदारी कायम रखने की जुगाड़ लगा लिया है और इसका प्रचार प्रसार कर रहे है जो किसी भी रूप में सही नही है। बाबा उनको सद्बुद्धि दे।

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