Home / Uncategorized / वाराणसी – उत्तर प्रदेश में खाद्य मिलावट पर बड़ा सवाल: “पहले इंसान या पहले विकास ?”

वाराणसी – उत्तर प्रदेश में खाद्य मिलावट पर बड़ा सवाल: “पहले इंसान या पहले विकास ?”

अमित पाठक अपनी कलम से
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार तेज है स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, चौड़ी सड़कें, नए कॉरिडोर और बड़े-बड़े दावे लगातार सुर्खियों में हैं। लेकिन इसी बीच एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है क्या जनता की थाली सुरक्षित है?
शहर और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से दूध, मावा, मिठाई, मसाले और तेल में मिलावट की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। त्योहारों के दौरान छापेमारी और नमूना जांच की खबरें जरूर आती हैं, लेकिन सालभर नियमित और कठोर निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य के संबंधित विभाग और केंद्रीय संस्था Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत तय है। नियमों के अनुसार मिलावट पाए जाने पर भारी जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है। इसके बावजूद बाजारों में खुले दूध, सस्ते मावा और बिना लेबल वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि दूध और पानी जैसी बुनियादी चीजों की नियमित जांच सुनिश्चित नहीं होगी, तो आम लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थ लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
अमित पाठक अपनी कलम से यह सवाल उठाता है
“ यदि इंसान ही स्वस्थ नहीं रहेगा, तो विकास की इन परियोजनाओं का लाभ किसे मिलेगा ?”
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाता है, लेकिन पारदर्शिता को लेकर मांग उठ रही है कि हर जिले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। कितने नमूने फेल हुए, कितनों पर कार्रवाई हुई और कितनों के लाइसेंस रद्द किए गए यह जानकारी जनता के सामने लाई जानी चाहिए।
नागरिकों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
साप्ताहिक अनिवार्य सैंपलिंग
जांच रिपोर्ट ऑनलाइन सार्वजनिक करना
दोषियों के नाम उजागर करना
बार-बार दोषी पाए जाने पर स्थायी लाइसेंस रद्द करना
वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक शहर में खाद्य शुद्धता का मुद्दा केवल स्वास्थ्य से नहीं, बल्कि विश्वास से भी जुड़ा है।
अब निगाहें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्योंकि सवाल सीधा है
पहले इमारतें बनेंगी या पहले इंसान सुरक्षित रहेगा? 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *