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वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पत्रकार समेत चार लोगों पर फिर से कर दिया गया फर्जी मुकदमा

दिवंगत अधिवक्ता (जिनकी पूर्व में हत्या की जा चुकी है) के परिवार को उत्पीड़ित करने के लिए रोजाना खेला जा रहा है फर्जी पर फर्जी मुकदमों का खेल

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, वाराणसी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस समय अपराध और अराजकता अपने चरम पर है, वर्तमान समय में प्रशासन के द्वारा ना तो वरिष्ठ अधिवक्ता को पहचाना जा रहा है और ना ही देश के चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार को किसी भी तबके के किसी भी आदमी पर पुलिसिया दबंगई अपने चरम पर है।
जानकारी के अनुसार वाराणसी जिले के मिर्जामुराद थाना अंतर्गत एक गांव जिसका नाम बहेड़वा हाल्ट है,इस गांव में अपराधियों को ((चंद्रभूषण मिश्रा, शिव प्रकाश मिश्रा, बजरंगी गौड़ अश्वनी कुमार मिश्रा, “चिरंजीवी” आकाश कुमार गौड़ एवं समस्त गिरोह के लोगो को)) उच्चस्तरीय राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण कुख्यात अपराधी चंद्रभूषण मिश्रा एवं शिव प्रकाश मिश्रा के बेशुमार पैसे एवं इनके राजनैतिक संबंधों, रसूख के माध्यम से प्राप्त है,, एवं दिवंगत अधिवक्ता जिनकी पूर्व में इसी चंद्रभूषण गैंग के सदस्यों के द्वारा निर्मम तरीके से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी,,अब ये हत्यारे 17 साल बाद जेल से छूट कर बाहर आ चुके हैं,,और फिर से इस परिवार पर अपने गिरोह के साथ मौत का साया बनकर मंडरा रहे हैं।
रोजाना एक शिक्षित अधिवक्ता परिवार को नाना प्रकार के साजिश एवं षड्यंत्र के तहत फर्जी मुकदमों में फसाने का खेल खेला जा रहा है,, कभी फर्जी एसटीएससी तो कभी फर्जी छेड़खानी तो कभी फर्जी एप्लीकेशन पर फिर से फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आदेश और आश्चर्य की बात तो यह है कि इन सब में इनको प्रशासन से भरपूर सहयोग मिल जा रहा है।
इनके सारे मुकदमे श्रीमान डीसीपी गोमती जोन श्री आकाश पटेल जी के आदेश पर ही दर्ज होते रहे हैं,, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा की दिवंगत अधिवक्ता के हत्यारो को अब बड़े-बड़े अधिकारियों का भी सहयोग और संरक्षण इनके रसूख एवं राजनीतिक पहुंच से दबाव बनाते हुए मिल जा रहा है, और श्रीमान डीसीपी गोमती जोन के सहयोग से रोजाना आयेदिन एक दिवंगत अधिवक्ता के शिक्षित पुत्रों – जिनके दो पुत्र अधिवक्ता एवं दो पुत्र पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, ऐसे शिक्षित परिवार का अपराधीकरण बिना वजह एक सोची समझी साजिश एवं षड्यंत्र के तहत योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है।
इसी क्रम में दिनांक 22.02.26 को इनके ग्रुप की सक्रिय महिला सदस्य कथित पत्रकार विजय लक्ष्मी तिवारी खुद के महिला होने का फायदा उठाते हुए ((जो कुछ महीनो से इन अपराधियों से साठ गांठ करके अब इनसे प्रलोभन लेकर इन अपराधियों इशारे पर अब फर्जी वाडा करने का काम कर रही है))दूसरी बार फिर से डीसीपी गोमती जोन आकाश पटेल जी के आदेश पर एक फर्जी तथ्यहीन मुकदमा मिर्जामुराद थाने में वरिष्ठ अधिवक्ता समेत उनके पत्रकार भाइयों पर बड़े ही आसानी से पंजीकृत करवा ली है। जिससे अब सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है। आखिर प्रशासन क्या चाहती है? एक दिवंगत अधिवक्ता जिनकी निर्मम तरीके से गोली मारकर हत्या की जा चुकी है, उनके परिवार को सुरक्षा देने के बजाय अब उस दिवंगत अधिवक्ता के पुत्रों को अब रोजाना फर्जी मुकदमों में फंसाने की कोशिश की जा रही है,,और बड़े दुख की बात है,की जिसमें प्रशासन भी बराबर की भूमिका निभाते हुए दिखाई पड़ रहा है। जबकि स्थानीय प्रशासन को इस बात का बहुत ही अच्छे से संज्ञान है की वो एक शिक्षित अधिवक्ता परिवार है, जो अपने परिवार के भरण पोषण एवं अपने नौकरी पेशा में व्यस्त रहने वाले लोग हैं, इनको रोजाना उत्पीड़ित किया जा रहा है,, जिनका अपराध एवं अपराधियों से कोई मतलब सरोकार नहीं है,, इन सब के बावजूद आखिर क्यों और किसके दबाव में एक दिवंगत अधिवक्ता के परिवार पर रोजाना फर्जी मुकदमों का खेल खेला जा रहा है।
ऐसे में वर्तमान समय में दिवंगत अधिवक्ता के परिवार पर किसी भी प्रकार का अप्रिय घटना कुख्यात अपराधियों के द्वारा कारित की जा सकती है,, जिसकी पूरी संभावना है,, क्योंकि वर्तमान समय में इन अपराधियों और इनके पूरे गिरोह का मनोबल अपने चरम पर है, जबकि दिवंगत अधिवक्ता के पुत्र जो पत्रकार हैं जिनका नाम पवन कुमार मिश्रा हैं। वो अपनी गुहार एवं अपना लाइव बयान फेसबुक को माध्यम बनाकर समय-समय पर सार्वजनिक तौर पर लोगों के सामने रखते रहे हैं,, लेकिन प्रशासन के द्वारा उनके किसी भी बयान पर आज तक ध्यान नहीं दिया गया, और ना ही इन अपराधियों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई, और उल्टा दिवंगत अधिवक्ता के परिवार का ही अपराधीकरण करने की एक सोची समझी साजिश का ताना-बाना इन अपराधियों और इनके गैंग के सक्रिय सदस्यों द्वारा रोजाना योजनाबद्ध तरीके से बुना जा रहा है।
शासन प्रशासन से अब ये परिवार इतना ही पूछता है की क्या अपने मान सम्मान और स्वाभिमान के साथ अपने परिवार का भरण पोषण करते हुए सम्मानित जीवन जीना अपराध है??
क्या वर्तमान बीजेपी सरकार में यही है हमारे अच्छे दिन?? 

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