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स्तनपान माँ और शिशु दोनों के लिए वरदान: डॉ. नीरज मौर्य

पूर्वांचल राज्य/चंदौली

 

सकलडीहा। बीसी गुप्ता हॉस्पिटल सकलडीहा के चिकित्सक डॉ. नीरज मौर्य ने कहा कि स्तनपान माँ और शिशु दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह न केवल नवजात शिशु को संपूर्ण पोषण देता है बल्कि माँ के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान कराने से माँ को प्रसव के बाद तेजी से रिकवरी मिलती है, गर्भकालीन वजन कम होता है और स्तन तथा ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी घटता है।

डॉ. मौर्य के अनुसार स्तनपान के दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे गर्भाशय तेजी से अपने सामान्य आकार में लौट आता है और माँ का तनाव भी कम होता है। इससे माँ और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।

उन्होंने बताया कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं में टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की संभावना भी कम हो जाती है। साथ ही यह प्रसवोत्तर अवसाद को कम करने में भी सहायक है, जिससे माँ मानसिक रूप से अधिक शांत और संतुलित रहती है।डॉ. मौर्य ने कहा कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम पोषण है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी नवजात को कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियों से बचाती हैं तथा उसके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जन्म के बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और दस्त, कान के संक्रमण तथा निमोनिया से बचाव में मदद करता है।उन्होंने बताया कि स्तन के दूध में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व, जैसे प्रोटीन, फैट और विटामिन, शिशु के समुचित विकास के लिए पर्याप्त होते हैं। साथ ही इसमें पाए जाने वाले डीएचए जैसे तत्व बच्चे के मस्तिष्क के विकास और बेहतर बौद्धिक क्षमता में सहायक होते हैं।
वहीं बीसी गुप्ता हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ अजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में प्रसव के बाद माताओं को तुरंत शिशु को स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है।हम लोग गावो में कैंप आदि के माध्यमों से माताओं को जागरूक करते है और उन्हें बच्चे को स्तनपान (मां का दूध)पिलाने की सलाह देते है।उन्होंने कहा कि नवजात शिशु को भैंस आदि का दूध किसी स्थिति में न पिलाए।उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति में नवजात को माँ का दूध ही दिया जाता है, लेकिन यदि प्रसूता की तबीयत बिगड़ जाती है या स्थिति आपातकालीन अथवा संवेदनशील होती है, तो ऐसे मामलों में शिशु की जरूरत को देखते हुए फार्मूला दूध की व्यवस्था की जाती है।डॉ. मौर्य ने अभिभावकों को सलाह दी कि नवजात शिशु को जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराना चाहिए और कम से कम छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध ही देना चाहिए, जिससे शिशु को सर्वोत्तम पोषण और बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।

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