कृष्णा पंडित की कलम से ✍🏻
लेकिन सिर्फ अपनी व्यवस्था चमकाई और धीरे धीरे नकली व्यवस्था से लोगों को लुभावना वादा हिंदू राष्ट्र का लॉलीपॉप दिया और लाखों युवाओं को सोशल मीडिया पर लगाकर अपनी राजनीति को चमकाया जब बात राष्ट्र धर्म निभाने की बारी आई तो ना धर्म परिवर्तन पर कोई कड़ी कानून ला सके ना हिन्दू राष्ट्र बनाने की कोई कवायद की बल्कि आरक्षण रूपी लाठी देकर कमजोर को अपनी वोट के लिए और कमजोर बनाया, जो कानून लागू करने से समाज में भेदभाव बढ़े उसको कभी लागू नहीं करना चाहिए मगर वही जो दिल में वर्षों से उफान ले रहा था मसीहा बनने का जिसके चलते लगातार ऊंच, नीच छोटे बड़े होने का बीज बो दिया और फिर चले बात करने सबका साथ सबका विकास की इनको पता है की जो छल कपट सामान्य वर्ग के लोगों से कर रहे हैं उसके बाद भिक्षाटन तक औकाद नहीं बचेगी, किसी भी राज्य में सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा टैक्स देकर भारत निर्माण में सहयोग करने वाला इनकी दुकान पर जल्दी ताला लगाने वाला है बार बार झूठ और माथे पर चंदन टीका लगाने से कोई विकास पुरुष नहीं हो सकता, सच में तो ऐसे राजनीति करने वाले जो घृणा की दुकान और नफरत की बाजार से देश की अखंडता खंडित कर लगातार समाज में व्यमनस्ता को जन्म दे रहे हैं जिसका भुगतान जनमानस को करना पड़ रहा है..
बदलना है तो नेताओं को मिल रही खैराती सुख सुविधा पर विराम लगाने के लिए कानून लाओ, आम आदमी को तो कोई भी कानून लाकर अपनी व्यवस्था से दबोच ले रहे हो लेकिन राजनीति करने वाले लोग जो अपराध ही नहीं बल्कि भारत भविष्य पर गहरा संकट है जिनकी कारनामे रोज खुल रहे हैं सभी देश के बड़े नेताओं के धन संपत्ति और दूसरे देश की नागरिकता पर सवाल कब खड़ा होगा जब उनके घर परिवार के लोग दूसरे देश की नागरिकता ले लिया फिर भारत में कौन इनको ठेका दे रहा और कितना उचित है सिर्फ आम आदमी के साथ धोखा है जो राष्ट्र को लूटकर कमजोर कर रहा जिससे महंगाई आसमान छू रही है और गरीब परिवार खाए बिना मर रहा है!
क्या बदला पूर्व के लोग भी आम जनता का ही शिकार करते थे और तुम भी वही किया तुम्हारे पर लोगों ने भरोसा कर राष्ट्र में एक नई पहल के साथ उम्दा विश्वास जताया लेकिन तुम भी वही निकले जो दूसरी सरकार ने किया किसी ने खुलकर हिंदुओं को गला रेता, तुम पीछे से चेहरा बदलकर घाव दिए पूर्व की सरकारों ने जिस तरीके से देश में अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा जनसंख्या के आधार पर सिर्फ गंदी राजनीति के लिए इनका शिकार बनाया वर्तमान की सरकार भी उसी राह पर चल रही है किसी ने भी अल्पसंख्यक अति पिछड़ा को शिक्षित व रोजगार सही नियत के साथ नहीं दिया इसकी वजह से आज उनके अंदर विद्वेष की भावना फैल गई है !
बस एक ही बात कहना है पूरे देश में जो लोग विदेशी नागरिकता के साथ भारत में कई कंपनियों के मालिक और ठेकेदार बन बैठे हैं उनको तत्काल प्रभाव से उनका काम छीन कर जो भारत के लिए जी रहे हैं जो भारत की स्मिता की सम्मान और धरोहर हैं ऐसे लोगों को ही काम दिया जाए लिखने लगेंगे तो एक किताब ही लिखना पड़ेगा लेकिन बहुत सी बातों का जिक्र मैंने किया है जो शायद कई लोगों को पसंद ना आए जिसको पसंद आए पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेयर लाइक और फॉलो कीजिए !










