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बेसहारा की जमीन निगलने वाले ‘अजगर’ सलाखों के पीछे*

खाकी का प्रहार: दिव्यांग की मुस्कान और माफिया की ‘शाम’

करोड़ों की जमीन, फर्जी कागजात: वाराणसी पुलिस ने ध्वस्त किया माफिया का किला

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

रोहनिया/–वाराणसी के रोहनिया थाना पुलिस ने एक संगठित गिरोह द्वारा किए गए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस गिरोह ने एक जन्मजात मानसिक दिव्यांग व्यक्ति की करोड़ों रुपये की पुश्तैनी जमीन और बैंक खातों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। पुलिस कमिश्नर वाराणसी के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में भू-माफिया और जालसाजों का एक सिंडिकेट शामिल था।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित की मानसिक स्थिति का फायदा उठाया। गिरोह ने सबसे पहले पीड़ित का पैन कार्ड बनवाया और दो बैंकों में खाते खुलवाए। इन खातों में उन्होंने अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज कराई, जिससे बैंक से आने वाले सभी ओटीपी और सत्यापन कॉल पर उनका नियंत्रण रहा।

इसके बाद, आरोपियों ने पीड़ित का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार किया। गंगापुर रजिस्ट्रार कार्यालय में मिलीभगत से कमीशन के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली।

कागजों पर भुगतान वैध दिखाने के लिए पीड़ित के खाते में आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से लाखों रुपये भेजे गए। हालांकि, एटीएम कार्ड और चेकबुक पहले से आरोपियों के कब्जे में थे, जिसके कारण उसी दिन सारी रकम वापस निकाल ली गई। इस तरह पीड़ित के पास न जमीन बची और न ही कोई पैसा।

इस मामले में सरकारी तंत्र की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। गंगापुर चौकी प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि रजिस्ट्री कार्यालय गंगापुर भी जांच के दायरे में है। पुलिस इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि मानसिक अक्षम व्यक्ति का भौतिक सत्यापन किए बिना रजिस्ट्री कैसे हो गई।

रोहनिया पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मनोज पटेल (पुत्र हीरालाल पटेल, निवासी ऊंचगांव), विकास राय (पुत्र रामधनी राम, निवासी कनेरी) और मनोज कुमार राय (पुत्र हीरा लाल, निवासी केशरीपुर) शामिल हैं।

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