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साइबर ठगी की शिकार एएनएम धरने पर बैठी, अधीक्षक ने जेब से दिए 10 हजार

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। साइबर ठगी की शिकार एएनएम रीमा पटेल और चिकित्सा प्रशासन के बीच विवाद ने गुरुवार को नाटकीय रूप ले लिया। ठगी की जिम्मेदारी चिकित्सा अधीक्षक पर डालते हुए एएनएम अपने सहयोगियों के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बांसडीह परिसर में धरने पर बैठ गईं। स्थिति को शांत करने के लिए अधीक्षक ने अपनी जेब से सहायता राशि दी और भावुक होकर पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। पीड़ित एएनएम ने अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ पीएचसी परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उनका आरोप था कि चिकित्सा अधीक्षक द्वारा विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा की गई भ्रामक सूचना के कारण ही वह साइबर जालसाजों के झांसे में आ गईं। उन्होंने मांग की कि ठगी गई पूरी धनराशि की जिम्मेदारी अधीक्षक लें और उसकी भरपाई करें। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे और स्वास्थ्य कर्मियों के तीखे रुख के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के अधीक्षक डा. प्रणव कुणाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़िता को तत्काल 10 हजार रुपये नकद दिए। साथ ही यह भी कहा कि जब तक पूरी ठगी की रकम की भरपाई नहीं हो जाती, वह हर माह अपनी ओर से 10 हजार रुपये देते रहेंगे। उन्होंने यह शर्त भी रखी कि यदि पुलिस जांच में ठगी की राशि वापस मिल जाती है, तो उन्हें दी गई रकम लौटा दी जाएगी। इस घटनाक्रम से आहत डा. प्रणव कुणाल ने अधीक्षक पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि अधीक्षक पद पर रहते हुए दूसरों की गलतियों का खामियाजा भुगतना अब संभव नहीं है। वे सामान्य चिकित्सक के रूप में ही सेवा देना बेहतर समझते हैं।

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