प्रतापगढ़ में सीएमओ ऑफिस में रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, स्टेनो और अनुचर रंगेहाथ गिरफ्तार
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, प्रतापगढ़।
प्रतापगढ़ के सीएमओ कार्यालय में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब विजिलेंस टीम ने सीएमओ के स्टेनो और एक अनुचर को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह रकम डिप्टी सीएमओ के मेडिकल अवकाश का वेतन बनाने के एवज में मांगी गई थी।
पट्टी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉ. अखिलेश जायसवाल की हाल ही में प्रतापगढ़ में डिप्टी सीएमओ के रूप में नियुक्ति हुई थी। तबीयत खराब होने पर उन्होंने 4 अगस्त से 1 सितंबर तक अवकाश लिया। दो सितंबर को उन्होंने अपना चिकित्सीय अवकाश स्वीकृत कराने हेतु फाइल वेतन लिपिक केके तिवारी को सौंपी। तिवारी ने यह काम सीएमओ के स्टेनो राहुल के अधीन बताया।
जब डॉ. अखिलेश ने राहुल से संपर्क किया, तो उसने 10,000 रुपये की ‘खर्च’ राशि मांगी। डॉ. अखिलेश ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत विजिलेंस विभाग, प्रयागराज से कर दी।
सोमवार अपराह्न करीब 2 बजे विजिलेंस की टीम प्रतापगढ़ सीएमओ कार्यालय पहुंची। वहीं डॉ. अखिलेश भी निर्धारित योजना के अनुसार राहुल को नकद देने पहुंचे। राहुल ने पैसे आउटसोर्सिंग पर तैनात अनुचर आलोक श्रीवास्तव के माध्यम से लिए, जिसके बाद टीम ने दोनों को तुरंत दबोच लिया।
जैसे ही टीम ने दोनों को कस्टडी में लेकर कार्यालय से बाहर निकाला, कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। विजिलेंस टीम उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ प्रयागराज ले गई।
*पुराना इतिहास, अब खुला नया चेहरा*
सीएमओ कार्यालय में मेडिकल क्लेम और वेतन भुगतान जैसे मामलों में रिश्वतखोरी कोई नई बात नहीं है। पूर्व में भी एक पुलिसकर्मी से मेडिकल बिल पास कराने के एवज में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भावना द्वारा रिश्वत लेने का मामला सामने आ चुका है, जिन्हें एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ पकड़ा था।
*”डिप्टी सीएमओ से रिश्वत?” सिस्टम पर बड़ा सवाल*
सीएमओ कार्यालय लंबे समय से टेंडर, दवाइयों की खरीद और उपकरण सप्लाई में गड़बड़ियों को लेकर चर्चा में रहा है। लेकिन इस बार विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी से रिश्वत लेने का मामला सामने आने से सभी हैरान हैं। सवाल उठ रहा है कि जब डिप्टी सीएमओ से रिश्वत की मांग की जा रही है, तो आम जनता और कर्मचारियों की स्थिति क्या होगी?
लोगों में चर्चा है कि सीएमओ कार्यालय की कार्यप्रणाली बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के इतनी बेहिचक नहीं हो सकती।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर किया है। देखने वाली बात यह होगी कि अब इस मामले में आरोपियों पर क्या कानूनी कार्रवाई होती है और क्या ऊंचे पदों पर बैठे लोग भी जांच के दायरे में लाए जाएंगे।










