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अति वृष्टि हर जनमानस के लिए बनी आफ़त – आवागमन, खेती-बाड़ी और पुराने आशियाने पर संकट

अति वृष्टि हर जनमानस के लिए बनी आफ़त – आवागमन, खेती-बाड़ी और पुराने आशियाने पर संकट

 

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो

महराजगंज/घुघली

महराजगंज,लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनपद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले कई दिनों से हो रही अति वृष्टि से गाँव की गलियां, कच्ची सड़कें और मुख्य मार्ग जलमग्न हो गए हैं। इससे लोगों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चे, दफ्तर आने-जाने वाले कर्मचारी और ग्रामीण बाज़ार तक पहुंचने वाले आम लोग घंटों फँसे रहने को मजबूर हैं। कई जगहों पर छोटे पुलों और नालों का पानी सड़कों पर चढ़ जाने से यातायात व्यवस्था ठप हो गई है।

खेती-बारी पर भी इस अति वृष्टि का गहरा असर पड़ा है। धान, और सब्ज़ी की फसलें जलभराव के कारण सड़ने लगी हैं। किसान अपनी मेहनत पर पानी फिरता देख हताश हैं। किसानों का कहना है यदि बारिश कुछ और दिन जारी रही तो खरीफ की फसल को भारी नुकसान होगा, जिससे आने वाले महीनों में अनाज और सब्ज़ियों के दाम बढ़ सकते हैं।

सिर्फ़ फसल ही नहीं, पुराने और कच्चे मकान भी इस बारिश से कमजोर पड़ गए हैं। कई जगहों पर दीवारें गिरने, छत रिसने और कच्चे आशियानों के ध्वस्त होने की खबरें आ रही हैं। ग्रामीण परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। राहत कार्य के लिए स्थानीय प्रशासन ने राजस्व विभाग और नगर निकाय को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन दल भी संवेदनशील इलाकों में निगरानी कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी अति वृष्टि पहले भी हुई है, लेकिन इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा भयावह है। गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि बारिश ने दशकों पुराने पेड़ों को भी उखाड़ दिया और निचले इलाकों में छोटे-छोटे तालाब बन गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण समस्या और बढ़ गई है। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि जलभराव हटाने, तटबंधों को मजबूत करने और प्रभावित लोगों को अस्थायी आश्रय व भोजन की व्यवस्था करने में तेज़ी लाई जाएगी।

यह अति वृष्टि न केवल जन-जीवन को प्रभावित कर रही है बल्कि आने वाले समय में स्वास्थ्य और आर्थिक संकट को भी जन्म दे सकती है। जलजमाव से मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ना तय है। विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन को आपात राहत योजनाएं तुरंत लागू करने की सलाह दी है।

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