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ओवरलोड स्कूली वाहन से बच्चों की जान खतरे में, जांच शुरू

ओवरलोड स्कूली वाहन से बच्चों की जान खतरे में, जांच शुरू

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, महराजगंज निचलौल
जनपद महराजगंज के निचलौल कस्बे के परागपुर स्थित एक निजी स्कूल का गंभीर लापरवाही भरा मामला सामने आया है। बीते दिन दोपहर स्कूल छुट्टी के बाद 10 सीटों वाली पीली मैजिक गाड़ी में क्षमता से दोगुने यानी 20 से अधिक बच्चों को बैठाकर घर भेजा गया। बच्चों से ठसाठस भरी इस गाड़ी का दरवाजा तक ठीक से बंद नहीं हो पा रहा था, जिससे उनकी सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
इस लापरवाही का वीडियो एक स्थानीय व्यक्ति ने बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। 46 सेकंड के वीडियो में चालक खुद स्वीकार करता नजर आता है कि गाड़ी एक निजी स्कूल की है और इसमें 20 बच्चे सवार हैं, जबकि सीटें केवल 10 की ही हैं।” वीडियो वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हजारों यूजर्स ने स्कूल प्रशासन पर बच्चों की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।एक यूजर ने लिखा— “स्कूल वाले पैसे बचाने के लिए बच्चों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं, ऐसे स्कूल को तुरंत बंद करना चाहिए।” वहीं, कई अभिभावकों ने कहा कि रोजाना ऐसी लापरवाही से हादसे होते रहते हैं लेकिन प्रशासन चुप बैठा रहता है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक परिवहन अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने जांच शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वाहन के रजिस्ट्रेशन, चालक के लाइसेंस और नियम उल्लंघन की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और अन्य कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिलेभर में स्कूली वाहनों की चेकिंग अभियान चलाने की घोषणा भी की गई।
स्कूल प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि निचलौल–बहुआर मार्ग पर एक अन्य वाहन खराब हो गया था। बच्चों को देर न हो इसलिए मजबूरी में मैजिक से भेजा गया। “यह जानबूझकर नहीं हुआ, हम सुरक्षा नियमों का पालन करते हैं और भविष्य में और सतर्क रहेंगे।”
इस बाबत खंड शिक्षा अधिकारी आनंद मिश्रा ने कहा कि बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि स्कूल प्रशासन दोषी पाया गया तो शिक्षा विभाग के नियमों के तहत स्कूल का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई होगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के परिवहन पर नजर रखें और किसी भी लापरवाही की तुरंत सूचना दें।
यह घटना प्रशासन और अभिभावकों के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी अनदेखी को नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है।

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