कलियुग में सबसे प्रभावशाली है भगवान का नाम: आचार्य दिव्यांशु जी
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो गोरखपुर।
शहर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य दिव्यांशु जी महाराज ने भगवान के अवतारों का वर्णन करते हुए कलियुग में भगवान के नाम की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “कलियुग में केवल भगवान का नाम ही मोक्ष का मार्ग है। जो राम-नाम या कृष्ण-नाम का स्मरण करता है, वह सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है।”
आचार्य जी ने कथा में राजा परीक्षित की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि जब राजा जंगल में शिकार के लिए गए, तो उन्होंने एक शूद्र को गाय और बैल को पीटते हुए देखा। पूछताछ पर ज्ञात हुआ कि वह शूद्र स्वयं कलियुग था। राजा परीक्षित ने उसे राज्य से निष्कासित करना चाहा, तब कलियुग ने अपने निवास के लिए पाँच स्थान मांगे… जुआ, मांसाहार, स्त्री व्यभिचार, मदिरा और स्वर्ण। राजा ने उसे इन्हीं पाँच स्थानों पर निवास की अनुमति दी।
कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रमुख रूप से गुलाब चन्द जायसवाल, अनिल सिंह, सुभाष जायसवाल, चन्दन जायसवाल, शिवम् जायसवाल, राजेश जायसवाल और राकेश जायसवाल सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने कथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया।










