बेशर्म संतोष वर्मा,सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश..
. जहरीला बयानबाजी करने वाला संतोष वर्मा नाम का बे’हुदा व्यक्ति मध्य प्रदेश कैडर का वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। देश की सबसे संभ्रात व्यवस्था ब्यूरोक्रेसी का हिस्सा हैं।और इनके कलम से लाखों लोगों का भविष्य तय होता होगा!लेकिन जब वही वरिष्ठ अधिकारी खुद धोखाधड़ी करने और कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल करते हुए जेल गया हो तो उसकी मानसिकता समाज के प्रति कैसे स्वस्थ हो सकती?
संतोष वर्मा अपने बेहुदगी वाले बयान से सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चर्चा में है।इस अधिकारी की पृष्ठभूमि ही अपराधियों वाली रही है।2012 में महिला से बलात्कार के मामले में जेल जाना फिर जज के फर्जी हस्ताक्षर कर जेल से बाहर आना।धोखाधड़ी करने फर्जी कागज पर प्रमोशन पाना फिर जेल जाना यह साबित करता है कि यह स्वस्थ समाज के अमन चैन का मानसिक आतंकी है।
संतोष वर्मा की बेहुदगी भरी भाषा सामाजिक सौहार्द,मर्यादा और मानवीय मूल्यों के लिए अभिशाप समान हैं। उसके यह बयान घोर विकृत, पथभ्रष्ट और निंदनीय मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है। कोई भी सभ्य समाज, कोई भी सुसंस्कृत जाति-समुदाय, अपनी बहनों-बेटियों के संदर्भ में प्रयुक्त ऐसी घृणास्पद, निकृष्ट और अमर्यादित भाषा का न तो समर्थन कर सकता है और न ही इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार कर सकता है।
मुझे आश्चर्य हो रहा है कि संतोष वर्मा देश की सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हैं।उसका यह कुंठित मनोभाव अपेक्षित निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।ऐसे व्यक्ति पर सरकार को कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करना चाहिए।यह कैसे अभी तक नौकरी कर रहा है? अजीत कुमार पाण्डेय










