गाजीपुर- एक साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में 15 दिन में उम्रकैद, पोक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
गाजीपुर।
जिले में एक साल की मासूम बच्ची से दरिंदगी के मामले में शुक्रवार 26 सितंबर को विशेष पोक्सो न्यायालय ने मात्र 15 दिनों में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी सौतेले पिता को आजन्म कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 1,00,000 रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
यह फैसला “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत पुलिस और अभियोजन की सशक्त टीमवर्क का नतीजा है, जिसने त्वरित विवेचना और प्रभावी पैरवी से न्याय की एक नई मिसाल पेश की है।
घटना की पृष्ठभूमि
यह दिल दहला देने वाली घटना 18 जुलाई 2025 को शादियाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में घटित हुई। महिला अपने दूसरी शादी से बने परिवार के साथ रहती थी। बच्ची उसके पहले पति की संतान थी। घटना के दिन महिला खेत में धान रोपने गई थी। घर पर बच्ची की सौतेली दादी और उसका सौतेला पिता अशोक बनवासी मौजूद थे।
जब दादी घर के बाहर थीं, तब बच्ची को उसकी देखरेख में छोड़ दिया गया था। इसी दौरान आरोपी ने मासूम के साथ दरिंदगी की। बच्ची को गंभीर अवस्था में वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां अब तक 6 सर्जरी हो चुकी हैं, और वह अभी भी इलाजरत है।
प्रभावी पुलिस कार्यवाही और अभियोजन
घटना सामने आने के बाद 20 सितंबर 2025 को थाना शादियाबाद में मुकदमा संख्या 243/2025 दर्ज किया गया। विवेचना का जिम्मा थाना प्रभारी निरीक्षक श्यामजी यादव को सौंपा गया, जिन्होंने मौखिक गवाहियों, मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर त्वरित जांच पूरी की।
कोर्ट में सुनवाई “डे-टू-डे बेसिस” पर की गई, जिसमें कुल 11 पेशियां हुईं। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रभु नारायण सिंह ने सशक्त पैरवी की।
कोर्ट का निर्णय
विशेष न्यायाधीश, पोक्सो कोर्ट गाजीपुर ने आरोपी अशोक बनवासी पुत्र स्व. लालता बनवासी, निवासी सराय गोकुल को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की गंभीर धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए मृत्यु पर्यंत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।
टीमवर्क से मिला न्याय
इस मुकदमे में प्रभावी भूमिका निभाने वालों में शामिल रहे:
विवेचक: निरीक्षक श्यामजी यादव
पैरोकार: हे.का. दशरथ लाल बिंद
कोर्ट मोहर्रिर: हे.का. राम प्रताप मिश्रा
मॉनिटरिंग सेल प्रभारी: उपनिरीक्षक जमुना प्रसाद
पर्यवेक्षण: अपर पुलिस अधीक्षक नगर एवं क्षेत्राधिकारी भुड़कुड़ा
न्याय की एक मिसाल
महज 15 दिनों में आया यह फैसला गाजीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में त्वरित न्याय का उदाहरण बन गया है। पुलिस और अभियोजन की प्रतिबद्धता, सतर्कता और समन्वय ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिलना संभव है।










