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नेपाल सीमा पर बर्ड फ्लू का खतरा: महराजगंज में हाई अलर्ट, चार तहसीलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज। नेपाल के झापा, मोरंग और सुनसरी जिलों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि के बाद सीमावर्ती महराजगंज जिले में उच्च स्तरीय सतर्कता बरती जा रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले की चारों तहसीलों—निचलौल, ठूथिबारी, सोनौली और महराजगंज—में चार रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित कर दी हैं। इन टीमों में कुल 27 पशु चिकित्सा अधिकारियों को तैनात किया गया है, जो किसी भी संभावित संक्रमण की सूचना पर तत्काल नमूना संग्रह, क्वारंटाइन और नियंत्रण कार्य शुरू करेंगे।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि नेपाल से सटी खुली सीमा के कारण महराजगंज में बर्ड फ्लू फैलने का खतरा सर्वाधिक है। प्रवासी पक्षी, अवैध पोल्ट्री व्यापार और सीमा पार आवागमन से वायरस भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है। एवियन इन्फ्लुएंजा को अत्यंत संक्रामक जूनोटिक बीमारी बताते हुए चेताया गया है, जो पोल्ट्री फार्मों में लाखों पक्षियों की मौत का कारण बन सकती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।
वायरस की प्रकृति और प्रसार का खतरा
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस कम तापमान में तेजी से पनपता है, लेकिन वर्ष भर सक्रिय रह सकता है। गर्मी की शुरुआत में इसका प्रसार और बढ़ जाता है, क्योंकि पक्षी झुंडों में उड़ान भरते हैं। सभी पशु चिकित्साधिकारियों को पशुपालन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध नेशनल एक्शन प्लान के अनुसार सख्त सर्विलांस लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इसमें पोल्ट्री फार्मों का दैनिक निरीक्षण, पक्षियों के लक्षणों (श्वास कष्ट, सूजन, मृत्यु दर) की जांच और संदिग्ध नमूनों को बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजना शामिल है।
रोकथाम के व्यापक उपाय
जिला प्रशासन ने सीमावर्ती चेकपोस्टों पर एसएसबी और स्थानीय पुलिस को नेपाल से पोल्ट्री उत्पादों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं। पोल्ट्री फार्म मालिकों को बायो-सिक्योरिटी मानकों—जैसे फार्म की सफाई, डिसइन्फेक्शन, कर्मचारियों के लिए मास्क-ग्लव्स—का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि जंगली या असत्यापित स्रोतों से मुर्गे-मुर्गियां न खरीदें और बीमार पक्षियों को तुरंत रिपोर्ट करें। जिला स्तर पर हेल्पलाइन नंबर (1076) सक्रिय कर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां 24×7 निगरानी हो रही है।
पिछले प्रकोपों के अनुभव से सबक लेते हुए विभाग ने पूर्वानुमानित जोखिम वाले 50 से अधिक पोल्ट्री फार्मों पर विशेष फोकस किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सतर्कता से इस महामारी को रोका जा सकता है, जो न केवल पशुपालन बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती है। प्रशासन ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया है।

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