पितृपक्ष में पिशाच मोचन का पुण्य स्नान: त्रिपिंडी श्राद्ध से पितृ होते हैं प्रसन्न
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी।
पिशाच मोचन मंदिर के महंत सुमित उपाध्याय और आचार्य पंडित उदय नारायण उपाध्याय ने दैनिक अखबार ‘पूर्वांचल राज्य’ के प्रधान संपादक श्री कृष्णा पंडित जी से बुधवार को विशेष बातचीत में बताया कि पितृपक्ष के पावन अवसर पर पिशाच मोचन तीर्थ पर 15 दिवसीय श्राद्ध मेला आयोजित किया जाता है। इस दौरान त्रिपिंडी श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण जैसे कर्मों का विशेष महत्व होता है, जिससे पितरों की शांति और कृपा प्राप्त होती है।
पंडितों के अनुसार, पितृपक्ष के इन 15 दिनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और संपूर्ण पृथ्वी का भार पितृ देवताओं को सौंप दिया जाता है। ऐसे में पितरों की प्रसन्नता के लिए किए गए कर्मकांड विशेष फलदायी माने जाते हैं।
त्रिपिंडी श्राद्ध विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनके जीवन में कोई रोग, संतानहीनता, वैवाहिक अड़चनें, कार्य में विघ्न या अन्य प्रकार के दोष हैं। यह पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ पितृगण भी प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
महंत उपाध्याय जी ने बताया कि मृत्यु के उपरांत यदि पिंडदान, तर्पण या जलांजलि जैसे कर्तव्य समय से न किए जाएं तो व्यक्ति पितृ दोष का भागी बनता है। देवता यदि नाराज़ हो जाएं तो उपाय संभव है, लेकिन पितरों की नाराज़गी परिवार की उन्नति में बाधा बन सकती है। इसलिए पिशाच मोचन जैसे तीर्थ पर विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म कराना अत्यंत आवश्यक और कल्याणकारी होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह आयोजन पूरे वर्ष चलता है, लेकिन पितृपक्ष के दौरान इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस विशेष कालखंड में किए गए कर्मकांड अनंत पुण्य और सिद्धियों को देने वाले होते हैं, जो जीवन में शुभता और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।










