अधिवक्ता पर दरोगा का हमला, ट्रामा सेंटर में भर्ती
पुलिस के रवैये पर उठे सवाल, अधिवक्ताओं में आक्रोश
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी।
संवादाता(राजेश कुमार वर्मा)
एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधारने और आम नागरिकों को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही मातहत पुलिसकर्मी बेलगाम होते जा रहे हैं। आम नागरिकों की तो बात ही क्या, अब न्याय की लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
ताजा मामला भेलूपुर थाना क्षेत्र का है, जहां शनिवार रात एक क्राइम इंस्पेक्टर द्वारा एक अधिवक्ता पर कथित रूप से जानलेवा हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता शिवा प्रताप सिंह को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता थाने पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला
घायल अधिवक्ता की पत्नी शारदा सिंह ने भेलूपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उनके अनुसार 13 सितंबर की रात करीब 8 बजे वे अपने पति के साथ लक्ष्मी जी के दर्शन कर घर लौट रही थीं। जैसे ही वे रथयात्रा चौराहे पहुंचे, पुलिस ने ‘नो एंट्री’ बताकर उन्हें रोक दिया।
शिवा प्रताप सिंह ने पुलिसकर्मियों को बताया कि वे अधिवक्ता हैं और उनका घर पास में ही है। इस पर मौके पर मौजूद कन्हैया नामक दरोगा भड़क गया और कथित रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए बोला- “अधिवक्ता जीने लायक नहीं होते, ये कीड़े होते हैं, मारो साले को!” इसके बाद उसने किसी लोहे की वस्तु से अधिवक्ता के सिर पर हमला कर दिया।
हमले से अधिवक्ता का हेलमेट क्षतिग्रस्त हो गया और उनकी आंख के ऊपर गहरी चोट आई। उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
मामला दर्ज, जांच शुरू
शारदा सिंह की तहरीर पर भेलूपुर थाने में संबंधित दरोगा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352, 115(2), 109(1), और 324(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है, लेकिन यह घटना एक बार फिर पुलिस के अमानवीय और मनमाने रवैये को उजागर करती है।
क्या कानून के रखवाले ही बनेंगे कानून तोड़ने वाले
इस हमले ने कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या आम नागरिकों के बाद अब न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता भी असुरक्षित हैं? पुलिस के इस व्यवहार से जनता में असंतोष और अधिवक्ताओं में रोष फैल गया है।










