‘अजगरा’ में फिर दिखा ‘अजगर’! क्या गांव के नाम में ही छुपा है रहस्य?
पूर्वांचल राज्य वाराणसी।
खबर (राजेश कुमार वर्मा)
जिले के चोलापुर थाना क्षेत्र की अजगरा चौकी अंतर्गत ग्रामसभा नियारडीह एक बार फिर अजगर की दस्तक से दहल उठा। मंगलवार रात करीब 8:00 बजे, वाराणसी-जौनपुर बॉर्डर पर स्थित गोमती नदी के वनसत्ती घाट पुल पर एक विशाल अजगर (करीब 12 फीट लंबा) रेलिंग पर रेंगता हुआ देखा गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।
*ग्रामीणों ने कहा “अचानक रेलिंग हिलने लगी, फिर दिखा डरावना अजगर”*
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ग्रामीण पुल से गुजर रहे थे तभी उन्होंने रेलिंग के पास हलचल महसूस की। जब मोबाइल की रोशनी डाली गई तो सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं.. एक भारी-भरकम अजगर, पुल की रेलिंग पर चहल-कदमी कर रहा था। लगभग आधे घंटे तक वह रेलिंग पर रेंगता रहा और फिर नदी के बीच छलांग लगाकर गायब हो गया।
*क्या ‘अजगरा’ नाम में ही छिपा है ‘अजगर’ का रहस्य?*
अब सबसे चौंकाने वाला सवाल यह उठ रहा है.. क्या “अजगरा” नाम अपने भीतर ही “अजगर” का रहस्य समेटे हुए है?
पिछले 6 महीनों में यह तीसरी घटना है जब इस क्षेत्र में विशाल अजगर देखे गए हैं। स्थानीय लोग मानने लगे हैं कि शायद यह कोई संयोग नहीं, बल्कि कोई पुराना प्राकृतिक या पौराणिक संबंध हो सकता है, जिसकी तह में जाने की जरूरत है।
*जौनपुर की घनी झाड़ियों से आ रहे हैं अजगर?*
ग्रामीणों का कहना है कि पुल के पार, जौनपुर जिले की सीमा में घने जंगल, झाड़ियाँ और पेड़-पौधे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वहीं के जंगलों में पनप रहे अजगर पुल के माध्यम से वाराणसी सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। वनसत्ती घाट पुल इस आवागमन का एकमात्र सुरक्षित मार्ग बनता जा रहा है.. न सिर्फ इंसानों के लिए, बल्कि अब अजगरों के लिए भी!
*स्थानीयों ने प्रशासन से की सख्त निगरानी की मांग*
लगातार हो रही इन घटनाओं से स्थानीय लोग डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल और आसपास के क्षेत्रों में वन विभाग की गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
फिलहाल अजगर तो नदी में लापता हो चुका है, लेकिन लोगों के मन में डर और ‘अजगरा’ और ‘अजगर’ के नाम को लेकर उठते सवाल अभी भी तैर रहे हैं।










