दो सगी बहनों की मौत के बाद पिता बोले बेटियों को डॉक्टर-वैज्ञानिक बनाना चाहता था
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। जनपद के जीरा बस्ती गांव में बुधवार को करंट की चपेट आने से दो सगी बहनों आंचल और अल्का की मौत हो गई थी। दोनों बहनें स्कूल से पढ़कर घर लौट रही थीं। अचानक सड़क पर गिरे तार और जलजमाव की वजह से दोनों चपेट में आ गईं। जिससे दोनों बहनों की मौके पर ही जान चली गई। घटना सुखपुरा थाना क्षेत्र के जीराबस्ती गांव का है। अपनी दोनों बेटियों को खो चुकी सुनीता देवी गम में अपना सुध-बुध खो बैठी हैं। वह बार-बार विलाप करते हुए कहती रहीं- अब मैं कैसे जिऊंगी, मेरे जीने का सहारा मेरी दोनों बेटियां ही थीं। हे भगवान तूने मेरी बच्चियों को मुझसे क्यों छीन लिया, मुझे भी उनके साथ उठा लेता। आंचल और अल्का के पिता हरेराम यादव सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ थाने में में दीवान के पद पर तैनात हैं। बेटियों की पढ़ाई के लिए उन्होंने दो साल पहले मूल गांव बजड़हां से हटकर जीराबस्ती नई बस्ती में नया घर बनवाया था। हरेराम का सपना था कि बड़ी बेटी डॉक्टर और छोटी बेटी वैज्ञानिक बने। उन्होंने कहा कि जिन बेटियों को नाजों से पाला, आज उनकी अर्थी उठानी पड़ी। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है। बेटियों को मुखाग्नि देते समय हरेराम का सब्र टूट गया। उनका कहना था कि इस घटना से बिजली विभाग के अधिकारियों को सबक लेना चाहिए। ताकि ऐसी दुर्घटना दोबारा किसी और के बच्चे के साथ न हो। आंचल और अल्का ही हरेराम और सुनीता देवी की एकमात्र संतान थीं। दोनों की मौत के बाद परिवार पूरी तरह संतान विहीन हो गया है। गम में डूबे माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।










