सोनम वांगचुक की संस्था पर केंद्र का शिकंजा, विदेशी फंडिंग का लाइसेंस रद्द
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली।
(संवाददाता- राजेश कुमार वर्मा)
लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गैर-लाभकारी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय ने संस्था पर विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों के बार-बार उल्लंघन का आरोप लगाया है। इस फैसले के बाद अब संस्था विदेश से चंदा नहीं ले सकेगी।
सरकारी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ, जिसमें हिंसा भी भड़क गई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 59 अन्य घायल हुए हैं, जिनमें 30 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि वांगचुक ने युवाओं को हिंसा के लिए उकसाया। हालांकि, वांगचुक ने 24 सितंबर को अपनी 15 दिनों की भूख हड़ताल शांतिपूर्वक समाप्त की थी।
उधर, लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने हिंसा को उग्र भीड़ का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि जब सीआरपीएफ के वाहन में आग लगाई गई और अंदर मौजूद जवानों की जान को खतरा हुआ, तो आत्मरक्षा में सुरक्षाबलों को गोली चलानी पड़ी।
इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वांगचुक से जुड़ी संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) में एफसीआरए नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू की थी।
वांगचुक ने बताया कि करीब 10 दिन पहले सीबीआई की टीम लेह पहुंची थी और उन्हें बताया गया कि उनके संस्थान पर विदेशी फंडिंग से जुड़े तीन मामलों में नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। उन्होंने कहा, “हम एफसीआरए के तहत स्वीकृति लिए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान साझा कर राजस्व जुटाते हैं, जिसे सीबीआई ने उल्लंघन माना है।”
विरोध की चार प्रमुख मांगें
लद्दाख में चल रहे आंदोलन की चार प्रमुख मांगें हैं —
1. केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए
2. छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण मिले
3. लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें निर्धारित की जाएं
4. स्थानीय युवाओं को नौकरियों में आरक्षण मिले
बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया है। वहीं, दिल्ली में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि इस प्रदर्शन को ‘जेन-ज़ी’ की अगुवाई वाला बताने की कोशिश की गई, जबकि जांच में यह कांग्रेस से जुड़ा आंदोलन पाया गया है।
लद्दाख में 1989 के बाद यह सबसे बड़ा और हिंसक आंदोलन माना जा रहा है।










