विजय की रैली में भगदड़ से मचा हाहाकार, 31 की मौत; प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने जताया शोक
तमिलनाडु के करूर में दर्दनाक हादसा, मरने वालों में 6 बच्चे और 16 महिलाएं; 58 से अधिक घायल
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो करूर।
तमिलनाडु के करूर जिले में शनिवार शाम (27 सितंबर) अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) की रैली के दौरान मची भगदड़ में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 6 बच्चे, 16 महिलाएं और 9 पुरुष शामिल हैं। हादसे में 58 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एम. ए. सुब्रमणियन ने इस भीषण दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि भीड़ में एक 9 वर्षीय बच्ची के गुम होने की सूचना के बाद स्थिति बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई।
*भीड़ बेकाबू, विजय ने रोका भाषण*
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रैली में एक लाख से ज्यादा लोग पहुंच गए थे, जबकि प्रशासन से केवल 10 हजार की अनुमति ली गई थी। आयोजकों को 50 हजार लोगों की उम्मीद थी, लेकिन अनुमान से कहीं अधिक भीड़ उमड़ पड़ी।
रैली के दौरान मंच से विजय ने गुमशुदा बच्ची को तलाशने की अपील की। इसी दौरान कुछ लोग इधर-उधर दौड़ने लगे और भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग भीड़ में फंसकर सांस लेने में तकलीफ के चलते बेहोश हो गए। स्थिति बिगड़ते देख विजय ने भाषण बीच में रोक दिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए मंच से उतर गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ की आपात बैठक
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस हादसे को “गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। वे स्वास्थ्य मंत्री, जिला कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और एडीजीपी के संपर्क में हैं। मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने जताया शोक
इस हृदयविदारक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि “करूर की घटना अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।” राष्ट्रपति मुर्मु ने ट्वीट कर कहा कि “यह हादसा बेहद पीड़ादायक है। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी संवेदना और घायलों के लिए प्रार्थना है।”
एक जनसभा में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कैसे भारी पड़ सकती है, यह हादसा उसकी भयावह मिसाल बन गया है। लाखों लोगों की मौजूदगी में, एक छोटी सी अपील भी कैसे अनियंत्रित हालात पैदा कर सकती है, यह करूर की घटना ने साफ कर दिया है। अब सवाल यह भी है कि क्या ऐसे आयोजनों से पहले पर्याप्त तैयारी की गई थी या नहीं, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।










