मदन मोहन मालवीय की बगिया से निकले वैज्ञानिकों ने फिर रचा इतिहास
दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में बीएचयू-आईआईटी बीएचयू के 90 वैज्ञानिक शामिल
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी।
(संवाददाता- राजेश कुमार वर्मा)
शिक्षा और शोध की पावन धरा, महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी मेधा का परचम लहराने में सफल रहा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था एल्सिवियर द्वारा जारी ‘वर्ल्ड्स टॉप 2% साइंटिस्ट्स’ की सूची में बीएचयू और आईआईटी (बीएचयू) के कुल 90 वैज्ञानिकों ने अपना नाम दर्ज कराया है। यह न सिर्फ विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
यह रैंकिंग वैज्ञानिकों के साइटेशन, एच-इंडेक्स, सह-लेखन, और समग्र शोध प्रभाव जैसे मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। 22 प्रमुख और 174 उप-विज्ञान क्षेत्रों में उत्कृष्टता दिखाने वाले वैज्ञानिकों को इस सूची में स्थान मिलता है।
बीएचयू की ज्ञान-परंपरा का गौरव
बीएचयू का यह सम्मान उसकी शताब्दी से भी पुरानी शोध-परंपरा और अकादमिक संस्कृति की पुष्टि करता है। यह वही संस्थान है, जिसकी नींव महामना मालवीय जी ने राष्ट्र की वैज्ञानिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के उद्देश्य से रखी थी। आज जब बीएचयू के वैज्ञानिकों का नाम वैश्विक मंच पर दर्ज होता है, तो यह उस स्वप्न का मूर्त रूप है, जिसे महामना ने एक सदी पहले देखा था।
सम्मानित वैज्ञानिकों की सूची में शामिल
आईआईटी बीएचयू से सूची में प्रमुख नामों में डॉ. जहर सरकार, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. योगेशचंद्र शर्मा, डॉ. मनोज कुमार मंडल, डॉ. प्रांजल चंद्रा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. रश्मि रेखा साहू, डॉ. नेहा श्रीवास्तव, डॉ. सुदीप मुखर्जी, डॉ. प्रलय मैती और डॉ. प्रदीप कुमार मिश्रा प्रमुख हैं।
बीएचयू के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में प्रो. सलिल कुमार भट्टाचार्य, प्रो. जमुना शरण सिंह, कृष्णेंदु भट्टाचार्य, प्रो. हरिकेश बहादुर सिंह, प्रो. गणेश पांडेय, प्रो. श्याम बहादुर राय, प्रो. नवल किशोर दुबे, प्रो. राजीव प्रताप सिंह और प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी के नाम शामिल हैं।
विशेष रूप से, ‘हाइड्रोजन मैन’ के नाम से विख्यात स्व. प्रो. ओएन श्रीवास्तव को मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया है, जो बीएचयू की विज्ञान साधना का एक अमिट अध्याय हैं।
संस्थान की प्रतिक्रिया
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस अवसर पर कहा, “यह उपलब्धि हमारे संस्थान की अकादमिक गहराई, शोध की दृढ़ता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। यह मान्यता न केवल बीएचयू और आईआईटी बीएचयू की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, बल्कि हमारे छात्रों और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।”
बीएचयू की यह सफलता केवल रैंकिंग में एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, परंपरा और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह सिद्ध करता है कि मालवीय जी की यह बगिया आज भी ज्ञान के पुष्पों से महक रही है, और आने वाली पीढ़ियों को रोशनी दिखाने के लिए प्रतिबद्ध है।










